नयी दिल्ली , जनवरी 10 -- पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए करती है और जिन राज्यों में चुनाव तय होते हैं ईडी की टीम वहीं पहुंचकर विपक्षी दलों को परेशान करने लगती है।
श्री सिब्बल ने शनिवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में सरकार के इस रवैये को संघीय ढांचे पर हमला बताया और कहा कि गुरूवार को भी ईडी ने इसी तरह का काम किया है। उन्होंने ईडी टीम की ओर से पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस के लिए परामर्शदाता के रूप में काम करने वाली कंपनी आई-पैक के ठिकानों पर पड़े छापों का जिक्र किया और कहा कि ईडी के छापे उसी राज्य में पड़ने शुरु होते हैं जहां निकट भविष्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। उनका कहना था कि पिछले 11 साल से वह यही देख रहे हैं कि ईडी उस राज्य में पहले पहुंच जाती है जहां चुनाव होने हैं। ईडी ने पिछले दिनों इसी तरह का काम झारखंड और बिहार में भी किया और अब पश्चिम बंगाल में भी कर रही है।
उन्होंने कहा "आज सुबह जब मैं अखबार पढ़ रहा था तो मुझे 2004 से 2014 तक संप्रग सरकार के कार्यकाल की याद आ गयी। जिस तरह की खबरें आज अखबारों में चल रही हैं, हमने उन 10 वर्षों के दौरान ऐसा नहीं देखा। इसकी वजह थी कि संप्रग सरकार ने ईडी को विपक्षी दलों के नेताओं को परेशान करने की इतनी खुली छूट नहीं दी थी। संप्रग सरकार में हमने झूठी सूचना के आधार पर किसी भी राजनीतिक दल या नेता पर मुकदमा नहीं चलाया। अब हो यह रहा है कि जहां प्राथमिकी दर्ज होती तो वहां ईडी पहुंच जाती है। किसी भी राज्य में ईडी पहुंच जाती है और ईडी उसी राज्य में पहुंचती है जहां चुनाव होने हैं।"पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव होने हैं और चुनाव के दौरान भाजपा सरकार को अचानक याद आया कि उसे दस्तावेज़ चाहिए। अब तक उसने दस्तावेजों को हासिल करने की जरूरत नहीं समझी थी लेकिन अब चुनाव हैं तो इसकी जरूरत महसूस होने लगी है इसीलिए ईडी के छापे डलवा दिए। इससे जाहिर है कि उनका रवैया, उनकी सोच और उनके इरादे स्पष्ट रूप से पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को परेशान करना है। लेकिन यह भी तय है कि वहां वे जीत नहीं सकते।
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