नयी दिल्ली , जनवरी 29 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सव्यसाची इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (एसआईपीएल) तथा अन्य के खिलाफ दर्ज धन शोधन मामले में गुरुग्राम के फर्रुख नगर स्थित तीन अचल संपत्तियों को कुर्क किया है, जिनकी कुल कीमत 15.40 करोड़ रुपये आंकी गयी है।

ईडी के गुरुग्राम जोनल कार्यालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

ईडी ने यह जांच हरियाणा पुलिस और दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत सव्यसाची इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि., इसके निदेशक विजय राजन और अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत शुरू की थी।

जांच के अनुसार, सव्यसाची इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. ने 'अमाया ग्रीन्स प्रोजेक्ट', 'अमाया ग्रीन्स एक्सटेंशन' और 'अमाया बाजार' नाम से टाउनशिप और एससीओ योजनाएं शुरू की थीं, जिनके तहत भूखंड खरीदार विभिन्न आकार के प्लॉट/फ्लैट/एससीओ बुक कर सकते थे। कंपनी ने गुरुग्राम के सेक्टर-3, फर्रुख नगर में स्थित इन तीन परियोजनाओं में संपत्तियां देने के एवज में निवेशकों से धन एकत्र किया, लेकिन बाद में न तो वादे पूरे किये और न ही निवेशकों का पैसा लौटाया।

ईडी की जांच में सामने आया कि 2019 में एसआईपीएल ने सरकारी प्राधिकारियों से अनिवार्य लाइसेंस, स्वीकृतियां या प्रस्तावित भूमि पर स्वामित्व अधिकार प्राप्त किये बिना ही झूठे दावों के आधार पर बुकिंग शुरू की। यह भी आरोप है कि एसआईपीएल ने पहले से शिकायतकर्ताओं को वादा किये गये प्लॉट्स के विक्रय विलेख तीसरे पक्षों के पक्ष में निष्पादित कर परिसंपत्तियों को ठिकाने लगाने का प्रयास किया, जिनमें कंपनी से जुड़े व्यक्ति भी शामिल थे।

कंपनी ने एक वर्ष के भीतर प्लॉट/एससीओ का कब्जा और विकास कार्य पूरा करने तथा कब्जा मिलने तक निवेश राशि पर सुनिश्चित प्रतिफल देने का आश्वासन दिया था। हालांकि, न तो प्लॉट/एससीओ दिये गये और न ही सुनिश्चित प्रतिफल दिये। निवेशकों की राशि भी वापस नहीं की गयी। इस तरह तीन परियोजनाओं में 100 से अधिक प्लॉट खरीदारों के साथ धोखाधड़ी की गयी।

जांच में यह भी उजागर हुआ कि एसआईपीएल के निदेशकों/प्रमोटरों ने खरीदारों से एकत्र धन को अपने बेनामीदारों के नाम पर भूमि खरीदने में लगाया। अब तक की जांच के अनुसार इस मामले में लगभग 18 करोड़ रुपये की अपराध की आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) उत्पन्न हुई है।

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