नयी दिल्ली , दिसंबर 31 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने हाल ही में छत्तीसगढ़ के रायपुर और महासमुंद में भारतमाला योजना के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम राजमार्ग परियोजना के लिए ज़मीन अधिग्रहण के बदले गैर-कानूनी मुआवज़ा लेने के मामले में दस ठिकानों पर तलाशी ली।

ईडी के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में हरमीत सिंह खनूजा और घर और कार्यालयों के दस ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।

ईडी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो/आर्थिक अपराध शाख (ईओडब्ल्यू) , रायपुर द्वारा निर्भय साहू, तत्कालीन एसडीओ (राजस्व), अभनपुर, रायपुर और दूसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की।

प्राथमिकी में आरोप है कि आरोपियों ने रायपुर-विशाखापत्तनम राजमार्ग परियोजना के लिए ज़मीन अधिग्रहण के लिए सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी करके सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके गैर-कानूनी मुआवज़ा लिया था। ईडी की जांच से पता चला कि आरोपियों ने कुछ सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर, भारतमाला परियोजना के तहत मिली ज़मीन के लिए धोखाधड़ी से ज़्यादा मुआवज़ा हासिल किया। इसके लिए उन्होंने पिछली तारीख की प्रविष्टि के ज़रिए परिवार के सदस्यों के बीच ज़मीन के बड़े टुकड़ों को जानबूझकर बाँट दिया।

जांच के अनुसार ज़मीन का यह बनावटी बँटवारा ज़मीन अधिग्रहण से पहले कई छोटी जोतों को दिखाने के लिए किया गया था, ताकि ज़्यादा मुआवज़ा पाने के लिए मुआवज़े के तरीके का फ़ायदा उठाया जा सके। राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर करके ऐसे बँटवारे को अधिग्रहण प्रक्रिया से पहले हुआ दिखाया गया, जिससे गैर-कानूनी मुआवज़े की बढ़ी हुई रकम को मंज़ूरी दी गई और बाँटा गया। तलाशी की कार्रवाई में 40 लाख रुपये नकद, डिजिटल डिवाइस और कई तरह के आपत्तिजनक दस्तावेज़ ज़ब्त किए गए। साथ ही, तलाशी की कार्रवाई के दौरान तय अपराध से बने पीओसी से जुड़े लोगों के नाम पर हासिल की गई कई चल और अचल संपत्ति की पहचान की गई। मामले की आगे की जाँच जारी है।

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