कोलकाता , दिसंबर 03 -- पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को प्रकाश वाणिज्य प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमोटर-निदेशक मनोज कुमार जैन के खिलाफ एक बड़ी सफलता प्राप्त हुई है, जिन पर कथित रूप से धोखाधड़ी द्वारा बैंकिंग लेनदेन एवं ऋण राशि के हेर-फेर कर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से 234.57 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है।
ईडी ने दावा किया कि बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए वित्तीय विवरणों एवं जाली दस्तावेजों के आधार पर ऋण सुविधाएं प्राप्त करने के बाद धन को अवैध रूप से दूसरी जगह भेज दिया गया, जिससे सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 234.57 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
जांच के दौरान, ईडी ने पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में 199.67 करोड़ रुपये मूल्य की बेनामी संपत्तियों का पता लगाया और न्यायपालिका से चार कुर्की आदेशों के बाद उन्हें जब्त कर लिया।
जनहित की रक्षा एवं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की धन वसूली सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता को समझते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई बैठकें की।
इसके बाद, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने कुर्क की गई संपत्तियों की वापसी के लिए अपना आवेदन दायर किया, जिसे ईडी ने सहमति याचिका के माध्यम से समर्थन प्रदान किया और बैंक को संपत्तियां प्राप्त करने के लिए न्यायिक विचार आसान हो सका।
28 नवंबर को, कलकत्ता के सिटी सेशन कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कुर्क की गई संपत्तियों को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को वापस करने की अनुमति देते हुए कहा कि बैंक बकाया राशि की वैध वसूली का हकदार है।
अदालत ने कहा कि ईडी को प्रार्थना पर कोई आपत्ति नहीं है बशर्ते कि बकाया राशि का भुगतान किया जाए और पीएमएलए के अंतर्गत निर्णय के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अधिशेष राशि जमा करा दी जाए।
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