नयी दिल्ली , अप्रैल 02 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) रैकेट से जुड़े मामले में एम/एस अमित ट्रेडर्स समेत अन्य संस्थाओं के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अभियोजन शिकायत दर्ज की है।
इस मामले में लगभग 116 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है।
ईडी के ईटानगर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
ईडी अधिकारियों ने बताया कि शिकायत पीएमएलए की धारा 44 और 45 के तहत दर्ज की गयी है। जांच की शुरुआत असम राज्य कर विभाग की शिकायत पर जांच ब्यूरो (आर्थिक अपराध), गुवाहाटी में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की गयी थी, जिसमें बिना वस्तुओं की वास्तविक आपूर्ति के फर्जी चालानों के जरिए आईटीसी के धोखाधड़ीपूर्ण उपयोग और प्रसार का आरोप लगाया गया था।
ईडी ने पीएमएलए के प्रावधानों के तहत, गुवाहाटी के पुलिस स्टेशन में जांच ब्यूरो (आर्थिक अपराध) द्वारा दर्ज की गयी एक प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की। यह प्राथमिकी असम के राज्य कर विभाग द्वारा दर्ज की गयी एक शिकायत पर आधारित थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सामान की वास्तविक आपूर्ति के बिना, मनगढ़ंत इनवॉइस के आधार पर आईटीसी का धोखाधड़ी से लाभ उठाया गया और उसे सर्कुलेट किया गया। ये अपराध पीएमएलए के तहत 'शेड्यूल्ड अपराध' हैं।
जांच में सामने आया कि फर्जी और अस्तित्वहीन कंपनियों का एक सुव्यवस्थित नेटवर्क बनाकर बिना वस्तु या सेवा की आपूर्ति के चालान जारी कर आईटीसी का सृजन और प्रसार किया जा रहा था। एम/एस श्रीराम एंटरप्राइजेज को लगभग 116 करोड़ रुपये के फर्जी आईटीसी सृजन में मुख्य इकाई पाया गया, जिसे बाद में कई शेल कंपनियों के जरिए परत-दर-परत घुमाया गया। इन संस्थाओं में एम/एस अमित ट्रेडर्स, एम/एस नेमचंद सिंह ट्रेडर्स, एम/एस योगेश ट्रेडर्स, एम/एस पारस ट्रेडर्स, एम/एस श्री महालक्ष्मी एंटरप्राइजेज और एम/एस टेक्नोफैब इंटरनेशनल शामिल हैं। जांच में पाया गया कि एम/एस अमित ट्रेडर्स एक कागजी इकाई थी, जिसने बिना किसी वास्तविक व्यापारिक ढांचे या माल की आवाजाही के उच्च मूल्य के लेनदेन दिखाए।
ईडी के अनुसार एम/एस श्री महालक्ष्मी एंटरप्राइजेज और एम/एस टेक्नोफैब इंटरनेशनल, जिन्हें उबैद रहमान संचालित कर रहे थे, केवल फर्जी आईटीसी के लेयरिंग और प्रसार के लिए बनाई गई थीं, जबकि टेक्नोफैब इंटरनेशनल इस नेटवर्क की केंद्रीय इकाई के रूप में कार्य कर रही थी।
जांच में यह भी पता चला है कि एम/एस प्रिशा एक्सिम से लगभग 51 करोड़ रुपये फर्जी चालानों के आधार पर एम/एस टेक्नोफैब इंटरनेशनल के बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए। इन धनराशियों का उपयोग वास्तविक व्यापार के बजाय विभिन्न असंबद्ध खातों में भेजने के लिए किया गया, जिससे अपराध की आय की परतें बनाना, उसे छिपाना और खपाना स्पष्ट होता है।
वित्तीय जांच से संकेत मिला कि इन कंपनियों के बैंक खाते केवल अपराध से अर्जित धन को इधर-उधर घुमाने के माध्यम के रूप में उपयोग किए गए। आगे की जांच में यह भी पाया गया कि एम/एस प्रिशा एक्सिम सहित लाभार्थी संस्थाओं ने लगभग 7.39 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी उपयोग किया।
ईडी ने कहा कि अधिकांश कंपनियां अपने घोषित पते पर मौजूद नहीं पाई गईं और पीएमएलए की धारा 50 के तहत जारी समन भी तामील नहीं हो सके, जिससे उनके फर्जी होने की पुष्टि हुई। जांच के दौरान दर्ज बयानों से यह भी स्पष्ट हुआ कि बिना वस्तु आपूर्ति के चालान जारी कर जीएसटी देनदारी समायोजित की जा रही थी।
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