नयी दिल्ली , दिसंबर 30 -- प्रवर्तन निदेशाालय (ईडी) के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी निरंजन दास (तत्कालीन आबकारी आयुक्त कमिश्नर) और 30 अन्य आबकारी अधिकारियों की कुल 38.21 करोड़ रुपये कीमत की चल और अचल संपत्ति कुर्क की है।
ईडी ने मंगलवार को यह जानकरी दी। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "धनशोधन अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ के बड़े शराब घोटाले की चल रही जांच का हिस्सा है, जिससे राज्य के खजाने को 2,800 करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुकसान हुआ।"उन्होंने कहा कि कुर्क की गयी 38.21 करोड़ की संपत्ति में 21,64,65,015 रुपये की अचल संपत्ति शामिल हैं। 78 संपत्तियों में लग्ज़री बंगले, प्रीमियम कॉम्प्लेक्स में फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें और खेती की बड़ी ज़मीनें शामिल हैं,। इसके अलावा चल संपत्तियां ( 16,56,54,717 रुपये) की हैं जिनमें 197 वस्तुएं हैं जिनके तहत ज़्यादा कीमत के सावधि जमा , कई बैंक खातों में जमा , जीवन बीमा पॉलिसी और इक्विटी शेयर और म्यूचुअल फंड का अलग-अलग तरह का पोर्टफोलियो शामिल है।
उन्होंने कहा कि जांच से पता चला है कि वरिष्ठ अधिकारी और राजनीतिक हस्तियों से जुड़े एक आपराधिक गिरोह ने छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग को पूरी तरह से अपने कब्जे में कर लिया था। तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास और अरुण पति त्रिपाठी (तत्कालीन एमडी,सीएसएमएलसी) ने एक समानंतर आबकारी सिस्टम चलाया, जिसने भारी गैर-कानूनी कमाई करने के लिए राज्य के कंट्रोल को दरकिनार किया।
उन्होंने कहा कि गिरोह ने एक "पार्ट-बी" योजना चलाई जिसमें सरकारी दुकानों के ज़रिए बिना हिसाब-किताब वाली, ऑफ-द-रिकॉर्ड देसी शराब बनाना और बेचना शामिल था। यह गैर-कानूनी शराब डुप्लीकेट होलोग्राम और बिना हिसाब वाली बोतलों का इस्तेमाल करके बनाई और बेची गई थी। ''गैर-कानूनी शराब'' को सरकारी गोदामों को बायपास करते हुए सीधे डिस्टिलरी से दुकानों तक पहुँचाया गया था। यह धोखाधड़ी इन आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत और साज़िश से की गई थी।
जांच में पता चला कि आबकारी अधिकारियों को उनके इलाके में पार्ट-बी शराब की बिक्री की इजाज़त देने के लिए हर मद पर 140 रुपये का तय कमीशन दिया गया था। अकेले निरंजन दास को 18 करोड़ रुपये से ज़्यादा की अपराध से कमाई (पीओसी) हासिल करने का दोषी पाया गया और इस घोटाले को आसान बनाने के लिए उसे हर महीने 50 लाख रुपये की रिश्वत मिली।कुल मिलाकर, 31 आबकारी अधिकारियों की 89.56 करोड़ रुपये की पीओसी का पता चला है।
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