रायपुर , जनवरी 05 -- छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कार्रवाई करते हुए तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजनदास और 30 अन्य आबकारी अधिकारियों की कुल 38.21 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत की गई है।

ईडी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में कुल 78 अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनमें आलीशान बंगले, प्रीमियम आवासीय परिसरों में फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें और बड़े पैमाने की कृषि भूमि शामिल है। इसके साथ ही 197 चल संपत्तियां भी कुर्क की गई हैं, जिनमें उच्च मूल्य की सावधि जमा (एफडी), विभिन्न बैंक खातों में जमा राशि, जीवन बीमा पॉलिसियां, इक्विटी शेयर और म्यूचुअल फंड निवेश शामिल हैं।

ईडी का दावा है कि इस आबकारी घोटाले के कारण राज्य के खजाने को 2,800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ आबकारी घोटाले की जांच ईडी द्वारा की जा रही है। ईडी ने इस मामले में एसीबी में एफआईआर दर्ज कराई है, जिसमें 3,200 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का उल्लेख किया गया है। एफआईआर में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों को नामजद किया गया है।

ईडी की जांच में सामने आया है कि तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी ए.पी. त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया। आरोप है कि इस नेटवर्क के माध्यम से अवैध वसूली और कमीशनखोरी कर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

ईडी की इस कार्रवाई के बाद प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए कहा, "भाजपा की केंद्र सरकार के इशारे पर ईडी और अन्य एजेंसियां काम कर रही हैं। शराब घोटाले के सभी आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान जनता का ध्यान भटकाने और कांग्रेस नेताओं की छवि खराब करने के लिए यह आरोप लगाए गए। चार्जशीट के बाद न्यायालय की टिप्पणियों और ईडी को मिली फटकार से यह साफ हो चुका है कि पूरी कार्रवाई झूठ पर आधारित है। अदालत में भाजपा का यह प्रोपेगेंडा पूरी तरह बेनकाब होगा।"वहीं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, "छत्तीसगढ़ में घोटाला करने वालों और जनता का पैसा लूटने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। चाहे मामला किसी बड़े अधिकारी का हो, किसी नेता का हो या किसी प्रभावशाली व्यक्ति के परिवार का। यह भाजपा के संकल्प पत्र का वादा है और हमारी सरकार उसे पूरी दृढ़ता के साथ पूरा कर रही है।"ईडी सूत्रों के अनुसार, शराब घोटाले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और संपत्तियों की कुर्की तथा नए खुलासों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस कार्रवाई को राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक जांचों में से एक माना जा रहा है।

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