नयी दिल्ली , अप्रैल 07 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और उसके प्रबंध ट्रस्टी जावेद अहमद सिद्दीकी से जुड़ी 39.45 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है।

ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में जामिया नगर, ओखला स्थित सिद्दीकी का आवास, धौज गांव (फरीदाबाद) में अल-फलाह विश्वविद्यालय के पास कृषि भूमि, साथ ही डिमैट होल्डिंग्स, बैंक बैलेंस और फिक्स्ड डिपॉजिट शामिल हैं।

यह जांच दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज तीन एफआईआर के आधार पर शुरू हुई, जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं। ये अपराध मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत अनुसूचित अपराध की श्रेणी में आते हैं।

एफआईआर के अनुसार, अल-फलाह विश्वविद्यालय ने कथित तौर पर समाप्त हो चुकी एनएएसी 'ए' ग्रेड मान्यता को वैध बताया और यूजीसी की धारा 12बी की गैर-मौजूद मान्यता का भी दावा किया। इसके अलावा, अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर पर "कागजी फैकल्टी" और "फर्जी मरीजों" का इस्तेमाल कर नेशनल मेडिकल कमीशन से मंजूरी हासिल करने के आरोप लगे हैं।

ईडी ने 16 जनवरी 2026 को साकेत स्थित विशेष (पीएमएलए) अदालत में सिद्दीकी और ट्रस्ट के खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दाखिल की है। जांच में सामने आया है कि ट्रस्ट और विश्वविद्यालय ने 2016-17 से 2024-25 के बीच कथित तौर पर 493.24 करोड़ रुपये की "अपराध की आय" अर्जित की। इन पैसों को सिद्दीकी और उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों- कारकुन कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स, अमला एंटरप्राइजेज एलएलपी और दियाला कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड- में ट्रांसफर कर विदेशों में भेजा गया।

इससे पहले, 16 जनवरी 2026 को ही ईडी ने धौज (फरीदाबाद) स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय परिसर की 144.09 करोड़ रुपये की जमीन और इमारतों को भी कुर्क किया था।

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