नयी दिल्ली , अप्रैल 02 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अरविंद जोशी, उनकी पत्नी टीनू जोशी और अन्य से जुड़े मामले में धन-शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत अतिरिक्त आरोपपत्र दाखिल किया है। ईडी के भोपाल कार्यालय ने यह जानकारी दी।

ईडी ने यह जांच विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त, भोपाल द्वारा दर्ज एक मामले के आधार पर शुरू की थी। यह मामला दिवंगत अरविंद जोशी और टीनू जोशी (दोनों मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी) के खिलाफ 41.87 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति रखने के आरोप में दर्ज किया गया था। यह संपत्ति उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक थी।

अनेकानेक आरोप, शिकायतें और सबूत थे जिनसे संकेत मिलता था कि अरविंद जोशी और उनकी पत्नी टीनू जोशी ने अपने आधिकारिक पदों का दुरुपयोग किया और भ्रष्टाचार में लिप्त रहे।

ईडी की जांच में पता चला कि अरविंद जोशी और टीनू जोशी ने अपने नाम पर और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर भारी मात्रा में चल और अचल संपत्ति जमा कर ली थी।

आगे की जांच से यह भी साबित हुआ कि जोशी दंपति ने ऐसे लोगों के नाम पर भी संपत्तियां खरीदी थीं जिनसे उनका कोई संबंध नहीं था।

अपराध से अर्जित धन को छिपाने का यह तरीका धन-शोधन रोकथाम अधिनियम जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों से साबित हो गया है।

ईडी ने इससे पहले तीन 'अस्थायी कुर्की आदेश ' जारी किए थे, जिनके तहत अरविंद जोशी और उनके परिवार के सदस्यों की अवैध रूप से अर्जित 8.60 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया गया था।

इसके बाद 28 जनवरी, 2026 को एक और 'अस्थायी कुर्की आदेश' जारी किया गया, जिसके तहत दिवंगत अरविंद जोशी और उनके परिवार के सदस्यों की 5 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया गया। ये संपत्तियां अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई थीं।

इसके अलावा 31 मार्च, 2026 को एक अतिरिक्त अभियोजन शिकायत दाखिल की गई, जिसमें ऊपर बताई गई कुर्क की गई संपत्तियों को जब्त करने की मांग की गई है।

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