पटना , जनवरी 16 -- पटना साहिब के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बीच हुई दुखद घटना पर सर्वोच्च न्यायालय ने जो टिप्पणी की है, उससे गंभीर सवाल खड़े होते हैं और आजाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि भ्रष्टाचार की जांच कर रही एजेंसी से किसी राज्य की मुख्यमंत्री ने फाइल छीन लिया हो।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में आज संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री प्रसाद ने कहा कि जिस तरह से पश्चिम बंगाल सरकार बर्बरतापूर्वक ईडी के अधिकारियों को भ्रष्टाचार के विरुद्ध जांच से रोकने की कोशिश कर रही है, उस पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी गंभीर सवाल खड़े करती है।

भाजपा के सांसद ने कहा कि ईडी की यह छापेमारी ममता बनर्जी के आवास, दफ्तर या उनकी पार्टी तृणमूल( टीएमसी) के कार्यालय या किसी नेता के घर पर नहीं हो रही थी, यह छापेमारी आई पैक कंपनी के कार्यालय में हो रही थी। उन्होंने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि एक मुख्यमंत्री भागते हुए पहुंची और भ्र्ष्टाचार की जांच कर रही एजेंसी से फाइल छीन कर अपने साथ ले गई।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इस घटना की भर्त्सना करते हुए कहा कि अदालत में सरकार की ओर से बताया गया कि आईपैक कंपनी के पास कोयला घोटाले के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग के 20 करोड़ रुपये जमा करने का संदेहास्पद सबूत मिला था, जिसकी वजह से जांच जरूरी थी। उन्होंने कहा कि यह घोटाला करीब तीन हजार करोड़ रुपये का है।

श्री प्रसाद ने कहा कि इस सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय में ईडी ने स्पष्ट रूप से बताया है कि यह कार्रवाई क्यों आवश्यक थी, लेकिन जांच के दौरान वहाँ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहुंच गईं और एक महत्वपूर्ण फाइल लेकर चली गईं। उन्होंने कहा कि यह हास्यास्पद दृश्य सभी ने देखा और वहाँ प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) भी उपस्थित थे।

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