नयी दिल्ली , जनवरी 13 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई में बाधा डालने और दस्तावेज ले जाने पर एक बार फिर निशाना साधते हुये कहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐसा करके 'लोकतंत्र' का नहीं भीड़तंत्र का संदेश दिया है।

भाजपा प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ईडी की कार्रवाई को बाधित करके सुश्री बनर्जी ने अपने कार्यकर्ताओं को साफ संदेश दे दिया है कि तृणमूल अब लोकतंत्र के रास्ते पर नहीं, बल्कि 'मोबोक्रेसी' यानी भीड़तंत्र के रास्ते पर चल रही है।

श्री सिन्हा ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस का व्यवहार आधुनिक लोकतंत्र के बिल्कुल खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी बार-बार संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कुचलने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि आईपैक के दफ्तर में ईडी की छापेमारी को रोकने की कोशिश, बीएलओ की आत्महत्या, उत्तरपारा गैंगरेप मामला और राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य को धमकाना-ये सभी घटनाएं इस बात का सबूत हैं कि तृणमूल कांग्रेस अब एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि अपराधियों को संरक्षण देने वाला माफिया तंत्र बन चुकी है।

श्री सिन्हा ने बताया कि ईडी की कार्रवाई कोल घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की जांच के तहत हो रही थी। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस आईपैक को अपना राजनीतिक हथियार बताती रही है और जो वर्षों से उसके लिए चुनाव प्रबंधन करता रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में यह जांच जरूरी है कि क्या इस मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से आईपैक या तृणमूल कांग्रेस को धन मिला है। जांच कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं और कथित तौर पर कार्रवाई को रोकने की कोशिश की।

श्री सिन्हा ने कहा कि तलाशी अभियान के दौरान सुश्री बनर्जी कुछ फाइलें अपने साथ ले गईं, जो वर्ष 2022 की थीं, लेकिन आरोप लगाया गया कि यह रेड 2026 के चुनाव की तैयारी को समझने के लिए कराई गई है। श्री सिन्हा ने कहा कि यह पूरी तरह भ्रामक बयानबाजी है।

श्री सिन्हा ने मुर्शिदाबाद के बीएलओ हमीमुल इस्लाम की आत्महत्या का मामला उठाते हुये आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता बुलेट खान ने हमीमुल इस्लाम से 20 लाख रुपये उधार लिए थे और बार-बार मांग के बावजूद पैसे वापस नहीं किए। इसी आर्थिक दबाव और उत्पीड़न के चलते बीएलओ ने आत्महत्या की। इसके बावजूद तृणमूल कांग्रेस इस मामले को काम के चलते दबाव चुनाव आयोग पर डालने की कोशिश कर रही है।

श्री सिन्हा ने सवाल उठाया कि एक बीएलओ के पास 20 लाख रुपये कहां से आए और तृणमूल कांग्रेस नेताओं के बीच इस तरह का लेन-देन कैसे हो रहा है। उन्होंने इसे तृणमूल कांग्रेस के भीतर मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वसूली के नेटवर्क का संकेत बताया।

श्री सिन्हा ने उत्तरपारा में नाबालिग लड़की के साथ हुए गैंगरेप का मुद्दा भी उठाते हुये कहा कि इस मामले में तृणमूल कांग्रेस का एक कार्यकर्ता गिरफ्तार हुआ है, जबकि दो आरोपी फरार हैं। उन्होंने कहा कि जब इस मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य डॉ. अर्चना मजूमदार आगे आईं, तो तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके घर के बाहर प्रदर्शन किया, गालियां दीं और जान से मारने की धमकी तक दी।

श्री सिन्हा ने कहा कि सुश्री बनर्जी के शासन में हर रेप मामले में सबसे पहले पीड़िता को ही कटघरे में खड़ा किया जाता है। पार्क स्ट्रीट केस से लेकर शेख शाहजहां और आरजी कर मामले तक यही रवैया देखने को मिला है।

श्री सिन्हा ने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी पर भी पश्चिम मेदिनीपुर में जानलेवा हमला हुआ और पुलिस ने घंटों तक एफआईआर दर्ज नहीं की।

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