भरतपुर , जनवरी 08 -- राजस्थान में साइबेरिया के सुदूर जंगलों से उड़कर रूस, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होते हुए भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान आने वाले दुर्लभ प्रजाति के साईबेरियन सारसों के इस बार भी यहां नहीं पहुंचने से घना पक्षी विहार सूना लग रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जमीन से करीब 30 हजार फुट की ऊंचाई पर उड़ान भर 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से ये पक्षी करीब एक महीने में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान पहुंच जाते थे, लेकिन पिछले 25 वर्ष से यहां एक भी साइबेरियन सारस के नहीं आने से पक्षी प्रेमियों में मायूसी छाई है।

सेवानिवृत्त रेंजर भोलू अबरार खान ने गुरुवार को बताया कि अंतिम बार वर्ष 2001 में साइबेरियन सारस का एक जोड़ा साइबेरिया से भरतपुर आया था। वह वापस साइबेरिया नहीं लौट पाया। उसे रास्ते में ही मार दिया गया। यह सब कुछ अफगानिस्तान में होता रहा है।

उन्होंने बताया कि अफगानिस्तान में उनका शिकार मनोरंजन और भोजन के लिए किया जाने लगा। अब पूरी दुनिया में इनकी आबादी सिर्फ पांच हजार रह गई है। उन्होंने कहा कि साइबेरिया से भरतपुर आने वाले सारस अब यहां नहीं आते। या तो वे कहीं और जाने लगे हैं या फिर शिकार के डर से उन्होंने अपना रास्ता बदल लिया है।

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