चेन्नई , जनवरी 06 -- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपने अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान (एनजीएलवी) "सूर्या" के डिजाइन को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच रहा है और इसे देखते हुए अंतरिक्ष विशेषज्ञों का मानना है कि सुचारू रूप से क्रमिक उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन चरण में ही उद्योग भागीदारों को शामिल करने का यह सही समय है।

विशेषज्ञों का कहना है कि रॉकेट के विकास के बाद ही उद्योग को शामिल करने से उत्पादन और उत्पादन बढ़ाने में चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।उनका तर्क है कि डिजाइन चरण के दौरान ही उद्योग भागीदारों का चयन करने से यह सुनिश्चित होगा कि उत्पादन संबंधी आवश्यकताएं शुरुआत से ही प्रणाली में समाहित हों।

अंतरिक्ष क्षेत्र सलाहकार और इसरो के पूर्व उप निदेशक (प्रौद्योगिकी एवं प्रणाली) मुकुंद के. राव ने मंगलवार को कहा कि एक नई अंतरिक्ष प्रणाली विकसित करने और उसका बड़े पैमाने पर उत्पादन करने में मूलभूत अंतर है। विकास के लिए निरंतर अनुसंधान और तकनीकी नवाचार की आवश्यकता होती है, जबकि उत्पादन के लिए मानकीकृत डिजाइन और मजबूत विनिर्माण प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है।

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