चेन्नई , जनवरी 06 -- भारत के अंतरिक्ष विज्ञान कार्यक्रम में आदित्य-एल1 मिशन एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है जो सूर्य-पृथ्वी एल1 बिंदु से सूर्य का निरंतर और व्यापक अवलोकन सक्षम बनाता है।

मिशन से प्राप्त वैज्ञानिक डेटा नियमित रूप से सार्वजनिक डोमेन में जारी किया जाता है, ताकि वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय इसका उपयोग कर सके। वर्तमान में सार्वजनिक डोमेन में 23 टीबी से अधिक डेटा उपलब्ध है और कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिणाम अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यूड जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं।

इस अनोखे मिशन से वैज्ञानिक लाभ को अधिकतम करने के लिए, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पहला -'एनाउंसमेंट ऑफ ऑपर्च्युनिटी' 'अवसर की घोषणा' (एओ) जारी किया है। इसके तहत भारतीय सौर भौतिकी समुदाय से आदित्य-एल1 के अवलोकन समय के लिए शोध प्रस्ताव आमंत्रित किये गये हैं। जारी दस्तावेज़ में पात्रता मानदंड, प्रस्ताव जमा करने की प्रक्रिया तथा अवलोकन अनुसूची का विवरण दिया गया है। इसरो ने शोधकर्ताओं से आग्रह किया है कि वे एओ के सभी विवरणों को ध्यानपूर्वक पढ़ें और सौर एवं हेलियोस्फीयर विज्ञान की समझ को आगे बढ़ाने वाले उच्च गुणवत्ता वाले प्रस्ताव प्रस्तुत करें।

आदित्य-एल1 सौर मिशन को 2 सितंबर 2023 को इसरो द्वारा श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया था। यह भारत की पहली अंतरिक्ष-आधारित सौर वेधशाला है, जिसे सूर्य की कोरोना, क्रोमोस्फीयर और फोटोस्फीयर के अध्ययन के लिए सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु-1 (एल1) के चारों ओर हेलो कक्षा में स्थापित किया गया है। यह बिंदु पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर स्थित है, जिससे सूर्य की गतिविधियों का बिना किसी रुकावट के अवलोकन संभव होने के साथ साथ अंतरिक्ष मौसम से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा प्राप्त होता है।

आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान का हेलो ऑर्बिट इंसर्शन (एचओआई) 6 जनवरी 2024 को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस अंतिम चरण में नियंत्रण इंजनों को कुछ समय के लिए प्रज्वलित किया गया।

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