पटना, जनवरी 14 -- प्रसिद्ध कानूनविद और स्वतंत्रता सेनानी ब्रजकिशोर प्रसाद की 150 वीं जयंती पर आयोजित सम्मान समारोह में इतिहासकार डॉ. इम्तियाज अहमद, साहित्यकार अरुण कमल और पत्रकार प्रवीण बागी सहित पांच विशिष्ठ व्यक्तियों को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उनके उल्लखनीय योगदान के लिए बुधवार को सम्मानित किया गया।

पटना के ऐतिहसिक ब्रजकिशोर स्मारक प्रतिष्ठान के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में आज पटना मेडिकल कॉलेज के पूर्व विभागाध्यक्ष और प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ निगम प्रकाश नारायण ने सभी विशिष्ठ व्यक्तियों को सम्मानित किया।

इस वर्ष का ब्रजकिशोर प्रसाद सम्मान डॉ. इम्तियाज अहमद को समाज विज्ञान, अरुण कमल को साहित्य, प्रवीण बागी को पत्रकारिता, श्रीमती सुजाता मिश्रा को कला संस्कृति और चक्रवर्ती अशोक प्रियदर्शी को समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है।

इतिहास के प्रोफेसर श्री अहमद कई इतिहास की प्रमुख पुस्तकों और शोधपत्रों के लेखक हैं और लम्बे समय तक खुदाबख्श लाइब्रेरी के निदेशक रहे हैं। प्रो. अरुण कमल पटना विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्राध्यापक रहे हैं और देश के प्रबुद्ध हिंदी कवियों में उनकी गिनती की जाती हैं। उन्हें 1998 में साहित्य अकादमी पुरस्कार और भारत भूषण अग्रवाल जैसे कई बड़े पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।40 वर्षो से पत्रकारिता कर रहे प्रवीण बागी नवभारत टाइम्स और ईटीवी जैसे कई अखबारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रमुख पदों पर रहे हैं। श्रीमती सुजाता मिश्रा मिथिला चित्रकारी, गोदना शैली के लिए प्रमुख रूप से जानी जाती हैं। चक्रवर्ती अशोक प्रियदर्शी पांच दशकों से समाजसेवा के क्षेत्र में खासकर गया के आसपास भूमिहीनों के कल्याण के लिये काम करते रहे हैं।

सम्मान समारोह के दौरान राष्ट्रगान प्रस्तुत करने वाले कमला नेहरू शिशु विहार और अघोर कामिनी विद्यालय के बच्चों को सम्मानित किया गया।ब्रजकिशोर स्मारक प्रतिष्ठान के मंत्री सुरेंद्र प्रसाद जायसवाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और प्रो. मनोहर लाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

उल्लेखनीय है कि डॉ. ब्रजकिशोर प्रसाद भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख नेता, प्रख्यात कानूनविद और बिहार में राष्ट्रीय चेतना के अग्रदूत थे। उनका जन्म वर्ष 1877 में हुआ था। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर डॉ. प्रसाद ने अपनी सफल वकालत को त्याग कर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। वर्ष 1917 के चंपारण सत्याग्रह में उन्होंने किसानों के शोषण के विरुद्ध गांधी जी का साथ दिया और कानूनी सहायता प्रदान की। इसके बाद असहयोग आंदोलन और अन्य सत्याग्रहों में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई तथा कई बार जेल भी गए। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के ससुर ब्रजकिशोर प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के सहयोगी तथा मेंटर भी रहे थे।

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