इटावा , मार्च 28 -- उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के फिशरवन क्षेत्र में स्थित मोहम्मद गोरी के सेनापति शमसुद्दीन की मजार से जुड़े विवाद में शनिवार को प्राधिकृत अधिकारी वन न्यायालय में सुनवाई प्रक्रिया पूरी हो गई। अब इस मामले में जल्द ही निर्णय सुनाए जाने की संभावना है, जिसके बाद बेदखली की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

जिला वन अधिकारी एवं प्राधिकृत अधिकारी वन न्यायालय विकास नायक ने बताया कि मजार के संरक्षित वन भूमि पर होने के मामले में सभी पक्षों की सुनवाई पूरी कर ली गई है। पक्षकारों को 28 मार्च तक भू-अभिलेखों से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया गया था। हालांकि, निर्धारित समय तक अधिकांश पक्षकार ठोस राजस्व अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सके।

मजार पक्ष के सदर फजले इलाही एवं सहयोगी मुस्तकीम राईनी न्यायालय में उपस्थित हुए और उन्होंने बताया कि अपने दस्तावेज स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेज दिए हैं। मुस्तकीम राईनी ने दावा किया कि मजार 100 वर्ष से अधिक पुरानी है और 'बीहड़ वाले सैयद' के नाम से जानी जाती है। उन्होंने मौलाना सईद अहमद की पुस्तक 'इरफान-ए-औलिया' का हवाला देते हुए मजार के ऐतिहासिक अस्तित्व का उल्लेख किया तथा स्थानीय लोगों के हलफनामे भी संलग्न करने की बात कही। हालांकि, भूमि के भूलेखों में मजार के नाम दर्ज होने का कोई प्रमाण अब तक प्रस्तुत नहीं किया जा सका है।

मामले में एक अन्य पक्षकार गुलशेर अहमद भी भू-अभिलेख से संबंधित कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। उनके अधिवक्ताओं शेखर सक्सेना और अनुज तिवारी ने इस प्रकरण से अपना वकालतनामा वापस लेने का आवेदन न्यायालय में दिया।

वन विभाग की ओर से बढ़पुरा रेंजर अशोक कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि संरक्षित वन क्षेत्र में आती है, जहां किसी भी प्रकार का निर्माण वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत प्रतिबंधित है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1916, 1936 और 1946 के गजट के अनुसार यह भूमि वन विभाग के स्वामित्व में दर्ज है और इस पर किसी भी गैर-वानिकी गतिविधि को अवैध माना जाएगा।

उल्लेखनीय है कि 23 जनवरी को जिला वन अधिकारी न्यायालय में मजार को अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्तीकरण का वाद दायर किया गया था। इस मामले में 5 फरवरी से सुनवाई शुरू हुई और कई बार पक्षकारों को साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय दिया गया। अंततः 28 मार्च को सुनवाई पूरी कर ली गई। अब इस संवेदनशील मामले में न्यायालय के अंतिम फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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