इटावा , दिसम्बर 15 -- एशियाई मूल के बेहद आकर्षक रंग-बिरंगे पेंटेड स्टार्क पक्षी ने प्रजनन के लिए उत्तर प्रदेश के इटावा को अपना केंद्र बना रखा है। हजारों की संख्या में रंग-बिरंगे बेहद आकर्षक पेंटेड स्टार्क पक्षी का बड़ा आशियाना इटावा जिला बनता चला जा रहा है।

इटावा ओर आसपास के जिलों में पेंटेड स्टार्क पर लंबे अर्से से संरक्षण की दिशा में काम कर रही "द हैबिटैट्स ट्रस्ट" से जुड़ी पर्यावरणीय विशेषज्ञ डॉ.यशमिता ने सोमवार को यूनीवार्ता को एक विशेष भेंट में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पेंटेड स्टार्क पक्षी हजारों की संख्या में इटावा में अगस्त से लेकर फ़रवरी माह तक प्रजनन करने के लिए आते है और प्रजनन के बाद अपने अपने बच्चों के साथ उड़ जाते है। यह पक्षी पेड़ों पर रह कर प्रजनन की प्रक्रिया करता है। इस पक्षी को शिकारियों से बड़ा खतरा भी रहता है क्योंकि शिकारी कभी-कभी इन पक्षियों का शिकार भी कर लेते हैं। उन्होंने बताया कि पेंटेड स्टार्क पक्षी के हजारों संख्या में मौजूदगी रिपोर्ट की जा रही है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि पेंटेड स्टार्क पक्षी को किसान और स्थानीय लोगों का संरक्षण हासिल है और इसी वजह से पिछले करीब 15 सालों से यह पक्षी इटावा के विभिन्न अंचलों में अपनी मौजूदगी से स्थानीय लोगों को गदगद किए हुए हैं। इस पक्षी की मौजूदगी इटावा के साथ-साथ पड़ोसी मैनपुरी जिले में भी देखने को मिल रही है, पर्यावरण विशेषज्ञ ऐसा मानते हैं कि इटावा और मैनपुरी की वातावरण इस पक्षी के लिए मुफीद है इसलिए यह पक्षी हजारों की संख्या में प्रजनन करने को पहुंच रहे है।

उन्होंने बताया कि रंग-बिरंगे पेंटेड स्टॉर्क (मायकेटेरिया ल्यूकोसेफाला), जो उत्तर प्रदेश की एक स्थायी पक्षी प्रजाति है, एक बार फिर अपने पारंपरिक घोंसला स्थलों पर प्रजनन काल की शुरुआत के लिए लौट आया है। अपनी आकर्षक बनावट और पारिस्थितिक महत्त्व के लिए प्रसिद्ध ये भव्य पक्षी अगस्त माह से अपने घोंसला स्थलों की ओर आगमन शुरू करते हैं। इटावा ज़िले में सदर तहसील के फरहदपुरा गाँव में तथा दूसरा सैफई तहसील के उसराही गाँव में इसके दो महत्वपूर्ण घोंसला स्थलों की पहचान की गई है।

डॉ. यशमिता ने बताया कि पेंटेड स्टॉर्क पक्षी को द हैबिटैट्स ट्रस्ट ने "उत्तर प्रदेश में पेंटेड स्टॉर्क के घोंसला स्थलों का समुदाय-आधारित संरक्षण" शीर्षक से एक परियोजना आरंभ की है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य पक्षी के आवास का संरक्षण करना, समुदाय की सहभागिता को बढ़ावा देना तथा पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में इस प्रजाति के महत्त्व के प्रति जागरूकता फैलाना है।

उन्होंने बताया कि पेंटेड स्टॉर्क के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और विद्यालयी छात्रों को जोड़ने हेतु कई शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। क्षेत्र के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में व्याख्यानों की श्रृंखला तथा चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।

इस सिलसिले में आर. एल. पब्लिक स्कूल, उजियानी, सैफई, इटावा ओर रणवीर सिंह इंटर कॉलेज, बघुइया, सैफई, इटावा में व्याख्यानों के माध्यम से छात्रों को पेंटेड स्टॉर्क की जीवविज्ञान और व्यवहार से परिचित कराया गया। इसमें प्रजाति के पारिस्थितिक महत्त्व, वर्तमान जनसंख्या स्थिति तथा इसके समक्ष मौजूद खतरों पर विशेष जोर दिया गया।

छात्रों ने यह भी जाना कि इन पक्षियों का संरक्षण आर्द्रभूमियों और स्थानीय पारितंत्र के स्वास्थ्य को बनाए रखने में कैसे सहायक है। उन्होंने बताया कि व्याख्यानों के पश्चात "पेंटेड स्टॉर्क का संरक्षण" विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें 100 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रत्येक प्रतिभागी को चित्रकला किट उपलब्ध कराई गई। इस प्रतियोगिता ने न केवल छात्रों की रचनात्मकता को प्रोत्साहित किया, बल्कि उन्हें पेंटेड स्टॉर्क के आवास संरक्षण के महत्व पर चिंतन करने के लिए भी प्रेरित किया। कार्यक्रम के समापन पर छात्रों ने भावपूर्ण संकल्प लिया कि वे इन पक्षियों के घोंसला स्थलों के संरक्षण में सक्रिय योगदान देंगे और अपने गाँवों को इस संकटग्रस्त प्रजाति के लिए स्थायी आश्रय बनाए रखने का प्रयास करेंगे।

उन्होंने बताया कि द ट्रस्ट की यह परियोजना संरक्षण प्रयासों और समुदाय की सहभागिता के बीच की दूरी को पाटने का कार्य करती है। छात्रों और स्थानीय निवासियों को शामिल कर यह पहल इन पक्षियों तथा उनके पर्यावरण की रक्षा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का लक्ष्य रखती है। निरंतर सामुदायिक सहभागिता के साथ यह आशा की जा सकती है कि पेंटेड स्टॉर्क आने वाली पीढ़ियों तक इटावा में फलता-फूलता रहेगा।

डॉ.यशमिता ने बताया कि इटावा में जिन गांवों के आसपास पेंटेड स्टॉर्क पक्षी की मौजूदगी पाई जा रही है उस इलाके के किसान और स्थानीय लोग इस पक्षी के संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका अदा कर रहे हैं इसीलिए बड़ी संख्या में यह पक्षी इन इलाकों में खूब फल फूल रहा है। पक्षियों को खासी तादात में भोजन आदि भी मिल रहा है। इन पक्षियों का मुख्य भोजन कीड़े मकोड़े के अलावा खेतों में पाए जाने वाले सांप आदि होते हैं।

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