इंदौर , जनवरी 23 -- मध्यप्रदेश में इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को 63 वर्षीय बद्री प्रसाद की इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्हें उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद 17 जनवरी को अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बद्री प्रसाद टीबी की बीमारी से भी पीड़ित थे। इस मौत के साथ ही क्षेत्र में दूषित पानी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 26 हो गई है।

भागीरथपुरा में अब भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। अरविंदो अस्पताल में फिलहाल 10 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से एक वेंटिलेटर पर है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, भर्ती मरीजों में से 8 अन्य गंभीर बीमारियों से भी ग्रस्त हैं।

दूषित पानी की समस्या के चलते क्षेत्र में टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है। प्रशासन के अनुसार, क्षेत्र के करीब 30 प्रतिशत हिस्से में एक दिन छोड़कर पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई है और पानी की नियमित जांच भी की जा रही है। हालांकि, रहवासियों का भरोसा अभी पूरी तरह बहाल नहीं हो सका है और अधिकांश लोग आरओ या टैंकर के पानी का ही उपयोग कर रहे हैं।

बाकी 70 प्रतिशत हिस्से में नई मेन पाइपलाइन डालने का काम तेजी से चल रहा है, जिसे जनवरी के अंत तक पूरा किए जाने की उम्मीद है। क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला के अनुसार, जिन इलाकों में पहले से पाइपलाइन डली थी, वहां लीकेज की जांच के बाद आपूर्ति शुरू की गई है।

क्षेत्र में रोजाना 50 से अधिक टैंकरों से पानी का वितरण किया जा रहा है। पाइपलाइन कार्य के कारण कई जगह टैंकरों को गलियों के पास तक लाया जा रहा है, ताकि रहवासियों को दूर न जाना पड़े।

इस पूरे मामले में मौतों के आंकड़ों को लेकर भी विवाद रहा है। पहले प्रशासन ने 4, फिर 6 मौतें मानी थीं। बाद में हाई कोर्ट में पेश रिपोर्ट में 21 मौतों में से 15 को स्वीकार किया गया। अब तक कुल 26 मौतें हो चुकी हैं। मामले में अगली स्टेटस रिपोर्ट 27 जनवरी को हाई कोर्ट में पेश की जानी है।

सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी के अनुसार, विभिन्न अस्पतालों में कई मरीजों का इलाज जारी है। इनमें किडनी, लिवर, न्यूरोलॉजिकल और मल्टी ऑर्गन डिस्फंक्शन जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज शामिल हैं, जिनका उपचार अलग-अलग अस्पतालों में किया जा रहा है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित