नयी दिल्ली , नवंबर 07 -- राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का प्रसिद्ध अस्पताल इंडियन स्पाइनल इंज्यूरी सेंटर (आईएसआईसी) 30 साल पूरा करने और चिकित्सा की विभिन्न सुविधाओं को जोड़ने के साथ ही अब मलटीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल बन गया है। यह घोषणा यहां शुक्रवार को भोली अहलुवालिया, चेयरपर्सन, आईएसआईसी मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने की। इस अवसर पर हॉस्पिटल का नया लोगो लॉन्च हुआ है जिसमें पुराना व्हीलचेयर का सिंबल रखा गया है - जो समावेशन और नई सोच, दोनों को दर्शाता है।

इस अवसर श्रीमति आहलुवालिया ने बताया कि मेजर एचपीएस अहलुवालिया ने आईएसआईसी की शुरुआत अपनी व्यक्तिगत कठिनाई को दरकिनार करते हुये समाज की सेवा के मिशन में बदल दिया। पिछले तीन दशकों से उनकी यह भावना हजारों लोगों में फिर से उम्मीद, गरिमा और चलने की क्षमता लौटाने के लिए हम सभी को प्रेरित करती रही है।

श्रीमति आहलुवालिया ने बताया कि हम उन मूल्यों के साथ, जिनसे हमारी शुरुआत हुई थी उसी भावना के साथ आने वाले कल की स्वास्थ्य ज़रूरतों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ते हुये आईएसआईसी मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के रूप में परिवर्तित हो गया है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य मरीजों को एक ही छत के नीचे विश्वस्तरीय और संपूर्ण इलाज प्रदान करना है।

श्रीमति आहलुवालिया ने बताया कि अस्पताल में कार्डियक साइंसेज़, रीनल साइंसेज़, न्यूरो साइंसेज़ और गैस्ट्रो साइंसेज़ जैसे नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू हुए हैं। आगे चलकर ऑन्कोलॉजी (कैंसर चिकित्सा) भी जोड़ा जाएगा। अगले पांच वर्षों अस्पताल 200 से बढ़कर 600 से ज़्यादा बेड करने के साथ ही चिकित्सा सेवाओं के लिये एआई, रोबोटिक्स और डिजिटल हेल्थ पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा। उन्होंने बताया कि ऐसे में समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है, इस कड़ी में मुफ्त जांच शिविर, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, और बुजुर्गों व दिव्यांगों के लिए सुविधाओं के साथ सेवा, करूणा के साथ स्वस्थ, समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में प्रतिबद्ध हैं।

इस अवसर पर सुगंध अहलुवालिया, आईएसआईसी मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की की चीफ स्ट्रैटेजी ऑफिसर ने कहा कि आईएसआईसी का मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में रूपांतरण, विकास और निरंतरता का प्रतीक है। संस्थान ने रीढ़ और रिहैबिलिटेशन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के साथ ही चिकित्सा के नए विभागों में वही गुणवत्ता, टीमवर्क बनाए रखना चाहते हैं, जो पिछले तीन दशकों से इसकी पहचान रही है। उन्होंने बताया कि संस्थान अगले पांच वर्षों में अपनी क्षमता 200 बेड से बढ़ाकर 600 बेड करने की योजना पर काम कर रहा है। पहले चरण में 100 नए बेड, नया 15-बेड वाला डायलिसिस यूनिट, उन्नत डायग्नोस्टिक उपकरण, और डिजिटल सिस्टम जोड़े जाएंगे।

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