गोवा , नवंबर 20 -- गोवा में चल रहे अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में प्रसिद्ध अभिनेत्री रेखा की 'उमराव जान' को ऐसे क्लासिक्स में शामिल किया गया है, जिसे महोत्सव में दिखाए जाने की तैयारी चल रही है। 'उमराव जान' को अपनी कहानी, संगीत और रेखा के अभिनय के लिए बड़े पैमाने पर सराहना मिलती रही है।
उल्लेखनीय है कि गोवा में चल रहे 55वें अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में 'उमराव जान' को 10 रिस्टोर की गई इंडियन क्लासिक्स की कैटीगरी में रखा गया है और इसे पोस्ट-प्रोडक्शन की बड़ी कंपनी 'प्रसाद' दिखाने जा रही है। यह महोत्सव 20-28 नवंबर तक गोवा में हो रहा है।
रिस्टोर की गई ये फिल्में राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी), नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया (एनएफएआई) और प्रसाद के बीच चल रहे सहयोग का हिस्सा हैं, जो भारतीय सिनेमा के कई दशकों को कवर करता है। इसमें मुजफ्फरअली की 1981 की कॉस्ट्यूम ड्रामा 'उमराव जान' शामिल है, जिसमें रेखा ने 19वीं सदी की एक तवायफ की भूमिका निभायी है। इसमें अली की 'गमन' (1978), कल्पना लाजमी की 'रुदाली' (1993), ऋत्विक घटक की 'सुवर्णरेखा' (1965), बाबूराव पेंटर की 'मुरलीवाला' (1927), गोविंद निहलानी की 'पार्टी' (1984), गुरुदत्त की 'प्यासा' (1957), श्याम बेनेगल की 'सुस्मान' (1987), सिबी मलयिल की 'किरीदम' (1989) और ऋषिकेश मुखर्जी की 'मुसाफिर' (1957) शामिल हैं।
प्रसाद के निर्देशक और सीटीओ अभिषेक प्रसाद ने कहा, "इन फिल्मों को रिस्टोर करना एक जिम्मेदारी और खास मौका दोनों है।" वैराइटी के मुताबिक, "हर टाइटल में भारत की सांस्कृतिक विरासत की एक अनुगूंज है और इसके जरिए फिल्म बनाने वालों की कला, हिम्मत और सृजनात्मकता की सिनेमाई भाषा परिभाषित होती है।"प्रसाद अपने आईएफएफआई शोकेस के अलावा 21-29 नवंबर तक फ्रांस में होने वाले 47वें नैनटेस थ्री कॉन्टिनेंट्स फिल्म फेस्टिवल में दो रिस्टोर की गई श्रीलंकाई फिल्में भी दिखा रहे हैं। रिस्टोर की गई फिल्मों में डीबी निहालसिंघे की 'वेलिकाथारा' (1971) और प्रसन्ना विथानागे की 'आकाश कुसुम' (2008) शामिल हैं।
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