नयी दिल्ली , फरवरी 05 -- भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने दिसंबर 2025 में बड़ी संख्या में उड़ानों में व्यवधान के लिए इंडिगो को प्रथमदृष्टया नियमों के उल्लंघन का दोषी मानते हुए आयोग के महानिदेशक को उसके खिलाफ जांच शुरू करने का निर्देश दिया है।

इंडिगो ने गुरुवार को शेयर बाजार को बताया कि सीसीआई ने चार फरवरी के आदेश में उसके खिलाफ जांच शुरू करने का निर्देश दिया है।

सीसीआई के आदेश में कहा गया है कि जिन यात्रियों ने इंडिगो की उड़ानों के टिकट बुक कराये थे उनके पास अंतिम समय में उड़ान रद्द होने की सच्चाई स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसके अलावा, यात्रियों के स्वयं विकल्प तलाशने के लिए छोड़ दिया गया।

रवनीत कौर की अध्यक्षता वाली सीसीआई की चार सदस्यीय पीठ ने अपने आदेश में कहा, "इंडिगो के वर्चस्व की स्थिति को देखते हुए यात्रियों को वास्तव में बांध दिया गया और उनके पास कोई उचित विकल्प नहीं बचा था। यह प्रतिस्पर्धा कानून की धारा 4(2)(ए)(1) का उल्लंघन है।"आयोग ने कहा कि हजारों की संख्या में उड़ानें रद्द करके, जो क्षमता का एक बड़ा हिस्सा था, इंडिगो ने वास्तव में बाजार में अपनी सेवाएं रोक दीं जिससे कृत्रिम अभाव पैदा हुआ और उच्च मांग के समय उपभोक्ताओं की पहुंच सीमित हो गयी। यह धारा 4(2)(बी)(1) का उल्लंघन है।

आदेश में कहा गया है, "एयरलाइन का यह व्यवहार प्रथमदृष्टया देश में प्रतिस्पर्धा को गंभीर रूप से प्रभावित करता प्रतीत होता है। इसलिए आयोग की राय है कि प्रथमदृष्टया दोनों धाराओं का उल्लंघन किया गया है।"सीसीआई ने आयोग के महानिदेशक को मामले की जांच का निर्देश देते हुए 90 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।

उल्लेखनीय है कि कार्तिकेय रावल नाम के एक यात्री ने आयोग के पास एयरलाइन के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी थी। उन्होंने 04 दिसंबर को इंडिगो की उड़ान में बेंगलुरु से दिल्ली की यात्रा की थी और 05 दिसंबर को दिल्ली-गोवा-बेंगलुरु मार्ग पर 7,173 रुपये में वापसी का टिकट बुक कराया था। एयरलाइन ने वापसी की उड़ान रद्द कर दी। इससे दूसरी विमान सेवा कंपनियों के भी टिकट के दाम काफी बढ़ गये और अंत में दो दिन बाद उन्होंने इंडिगो के ही नेटवर्क पर 17,000 रुपये में दिल्ली से बेंगलुरु का टिकट बुक कराया। उन्होंने आरोप लगाया है कि इंडिगो ने "खुद ही अपनी उड़ान रद्द की और फिर यात्रियों से काफी ज्यादा किराया वसूला" जो वर्चस्व की उसकी स्थिति का दुरुपयोग और प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन है।

आयोग ने जांच के दौरान विभिन्न विमान सेवा कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी, विभिन्न मार्गों पर उनकी उड़ानों की संख्या आदि के बारे जानकारी मांगी और पाया कि यात्री संख्या और उपलब्ध सीट किलोमीटर के मामले में इंडिगो की हिस्सेदारी लगातार 60 प्रतिशत से ऊपर रही है। उसने पाया कि 330 से अधिक मार्गों पर सेवा देने वाली वह अकेली कंपनी थी और निश्चित रूप के वह वर्चस्व की स्थिति में थी।

इंडिगो के इस तर्क को आयोग ने खारिज कर दिया कि मामले की जांच उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है, और महानिदेशक को जांच का निर्देश दिया।

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