रायपुर , मार्च 24 -- छत्तीसगढ़ के वन्यप्राणी बाहुल्य क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के प्रवेश से उत्पन्न खतरे को देखते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सह मुख्य वन्यजीव वार्डन ने राज्य के सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में भारत सरकार के राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
जारी निर्देशों में बताया गया है कि वन क्षेत्रों के समीप बसे गांवों से आवारा कुत्तों का प्रवेश वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन रहा है। इससे न केवल वन्यप्राणियों में बीमारियां फैलने की आशंका रहती है, बल्कि उनके शिकार और मृत्यु की घटनाएं भी सामने आती हैं। हाल ही में 20 और 21 मार्च 2026 की दरमियानी रात सरगुजा वनमंडल के अंबिकापुर स्थित संजय वाटिका में आवारा कुत्तों के बाड़े में घुसने से 15 वन्यप्राणियों की मौत हो गई थी। इस घटना की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है।
निर्देशों के तहत सभी टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारण्यों में तैनात अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर एसओपी के अनुरूप प्रशिक्षण देने को कहा गया है। साथ ही, क्षेत्रीय अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि वन क्षेत्रों में आवारा कुत्तों का प्रवेश पूरी तरह रोका जाए और प्रवेश की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा, बारनवापारा अभ्यारण्य में अपनाई गई व्यवस्था का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि गांवों में पालतू कुत्तों को विशेष रंग के पट्टे पहनाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे उनकी पहचान सुनिश्चित हो सके। इस पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इसी तर्ज पर अन्य वन क्षेत्रों के आसपास के गांवों में भी ग्रामीणों को जागरूक करने और आवश्यक सावधानियां बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
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