नयी दिल्ली , अक्टूबर 31 -- उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को आवारा कुत्तों के प्रबंधन से संबंधित मामले में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को वर्चुअल रूप से पेश होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया और निर्देश दिया कि उन्हें न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ेगा।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अपने निर्देशों का बार-बार पालन नहीं करने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और मुख्य सचिवों को शारीरिक रूप से उपस्थित होने से छूट देने के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध को खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा, "उन्हें प्रत्यक्ष रूप से आने दीजिए। दुर्भाग्यवश न्यायालय उन समस्याओं से निपटने में समय बर्बाद कर रहा है जिन्हें राज्य सरकारों और नगर निगमों को सुलझाना चाहिए था।"पीठ ने अनेक राज्यों तो अदालत के आदेशों का सम्मान नहीं करने के लिए फटकार लगाई और कहा, "संसद नियम बनाती है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। हम उनसे अनुपालन हलफनामा दाखिल करने की अपेक्षा करते हैं जिसमें कहा गया हो कि वे इसे अनदेखा कर रहे हैं। अदालत के आदेश का कोई सम्मान नहीं है। उन्हें आने दीजिए हम उनसे निपट लेंगे। उन्हें स्वयं आकर बताना होगा कि अनुपालन हलफनामा क्यों नहीं दाखिल किया गया।"सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल मेहता ने पीठ को सूचित किया कि अनुपालन हलफनामे दायर किए जा चुके हैं। हालांकि न्यायालय ने पाया कि शायद ये पिछली सुनवाई की तारीख के बाद प्रस्तुत किए गए हैं क्योंकि उस समय केवल तीन हलफनामे ही रिकॉर्ड में थे।
गौरतलब है कि 27 अक्टूबर को न्यायालय ने पशु जन्म नियंत्रण नियमों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों की रूपरेखा बताने वाला हलफनामा दाखिल करने में विफल रहने पर पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को तलब किया था।
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