जयपुर , जनवरी 11 -- राजस्थान की राजधानी जयपुर में 78वीं सेना दिवस परेड-2026 के द्वितीय पूर्वाभ्यास में रविवार को भारतीय सेना के अनुशासन, शौर्य और अदम्य जज़्बे का जीवंत प्रतीक बन गया, जिसमें सेना ने अपनी व्यावसायिक दक्षता और निरंतर विकसित होती युद्ध क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
रक्षा सूत्रों के अनुसार प्रातःकालीन हल्की धूप और शीतल कुहासे की चादर ओढ़े गुलाबी नगरी जयपुर उस समय राष्ट्रगौरव से सराबोर हो उठी, जब जगतपुरा स्थित महल रोड पर 78वीं आर्मी डे परेड 2026 के द्वितीय पूर्वाभ्यास का भव्य आयोजन किया गया। सूर्य की स्वर्णिम किरणों में नहाया यह दृश्य भारतीय सेना के अनुशासन, शौर्य और अदम्य जज़्बे का जीवंत प्रतीक बन गया।
प्रथम पूर्वाभ्यास की सफलता को और सुदृढ़ करते हुए, द्वितीय पूर्वाभ्यास ने जयपुर के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। पहली बार किसी नागरिक क्षेत्र के मध्य आर्मी डे परेड का आयोजन न केवल एक ऐतिहासिक पहल है, बल्कि यह भारतीय सेना और नागरिकों के बीच अटूट विश्वास और निकटता को भी सशक्त करता है। यह आयोजन गणतंत्र दिवस परेड की गौरवशाली परंपरा की झलक प्रस्तुत करता है और परंपरागत सैन्य आयोजनों से एक सार्थक परिवर्तन को रेखांकित करता है।
इस परेड की समीक्षा लेफ्टिनेंट जनरल एच एस वांद्रा, चीफ ऑफ स्टाफ, सप्त शक्ति कमांड द्वारा की गई। उनकी मोजूदगी ने आयोजन को विशेष प्रेरणा प्रदान की और यह संदेश दिया कि आर्मी डे परेड केवल परंपराओं का उत्सव नहीं बल्कि भारतीय सेना की ऑपरेशनल रेडीनेस, संगठनात्मक सुदृढ़ता और भविष्य उन्मुख आधुनिकीकरण का सशक्त मंच है।
राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में आयोजित इस परेड ने भारतीय सेना की शौर्य, बलिदान और परिवर्तन की गौरवगाथा को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया। बड़ी संख्या में नागरिकों, पूर्व सैनिकों, विद्यार्थियों और परिवारों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि वीरों की इस धरती पर सेना और समाज के बीच संबंध केवल औपचारिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और ऐतिहासिक हैं। विशेष महत्व इस बात का भी है कि साहस और बलिदान की प्रतीक भूमि राजस्थान पहली बार आर्मी डे परेड की मेजबानी कर रही है।
दिन का मुख्य आकर्षण स्वदेशी रूप से विकसित अत्याधुनिक सैन्य साजो सामान का भव्य प्रदर्शन रहा, जिसने आत्मनिर्भर भारत के प्रति भारतीय सेना की दृढ़ प्रतिबद्धता को साकार रूप दिया। उन्नत हथियार प्रणालियाँ, आधुनिक युद्धक मंच और नवीनतम सैन्य उपकरण जिनमें से अनेक ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी परिचालन क्षमता सिद्ध की उन विरासत प्रणालियों के साथ प्रदर्शित किए गए, जो आज भी राष्ट्र की सुरक्षा की मजबूत आधारशिला हैं। टैंक, आर्टिलरी, मिसाइल प्रणालियाँ, मानवरहित विमान, हेलीकॉप्टर, लड़ाकू विमान तथा नवगठित भैरव बटालियन दर्शकों के विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।
अंतरराष्ट्रीय मैत्री को सुदृढ़ करते हुए नेपाली सेना के दल की सहभागिता ने भारत-नेपाल के बीच साझा इतिहास, पारस्परिक विश्वास और घनिष्ठ सैन्य सहयोग के स्थायी संबंधों को सशक्त रूप से प्रतिबिंबित किया। वहीं, रंग-बिरंगी राजस्थानी झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और युद्ध परंपराओं को जीवंत कर दिया, जिसने दर्शकों को गहरे स्तर पर भावविभोर किया। द्वितीय पूर्वाभ्यास के दौरान जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसमें विभिन्न विद्यालयों और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों सहित समाज के सभी वर्गों के नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने।
आर्मी डे परेड समारोहों की श्रृंखला अब 13 जनवरी को अगले चरण में प्रवेश करेगी, जिसका भव्य समापन 15 जनवरी को आयोजित होने वाली आर्मी डे परेड के साथ होगा। इस अंतिम परेड की समीक्षा सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी द्वारा की जाएगी, जिसमें राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे एवं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तथा अनेक वरिष्ठ सैन्य एवं असैनिक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहेंगे। इस परेड का राज्यभर में सीधा प्रसारण किया जाएगा।
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