नयी दिल्ली , जनवरी 07 -- सेवा क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन और घरेलू उपभोग तथा निवेश की मांग के समर्थन से चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने और इसके पहली बार 200 लाख करोड़ के पार पहुंचने की संभावना है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने बुधवार को इस साल 31 मार्च को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी का पहला अग्रिम अनुमान जारी किया। इसमें कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी 201.90 लाख करोड़ रुपये पर रहने का अनुमान है। पहली बार ऐसा होगा कि जीडीपी 200 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को छुएगा।
इस तरह चालू वित्त वर्ष में भी भारत विश्व की सबसे तेजी से वृद्धि कर रही अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
आम बजट से पहले जारी अनुमानों के अनुसार, इस वर्ष पूंजी निर्माण में 7.8 प्रतिशत और निजी खपत में सात प्रतिशत की वृद्धि की संभावना है।
अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ जीडीपी 187.97 लाख करोड़ रुपये था।
उल्लेखनीय है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में 7.8 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। रिजर्व बैंक ने पूरे वित्त वर्ष में विकास दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।
भू-राजनैतिक चुनौतियों, अमेरिका द्वारा 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने और रुपये के ऐतिहासिक निचले स्तर तक उतरने के बावजूद यह वृद्धि दर वास्तव में देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
सरकार के उपभोग बढ़ाने के उपायों का असर भी अर्थव्यवस्था पर देखा जा रहा है। सरकार ने इसके लिए आयकर में छूट की सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपये सालाना कर दी है। साथ ही ज्यादातर सामानों पर वस्तु एवं सेवा कर की दरों में 22 सितंबर से कटौती की गयी है।
जीडीपी की अनुमानित वृद्धि में सेवा क्षेत्र का सबसे अधिक योगदान है। एनएसओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में सेवा क्षेत्र में 9.1 प्रतिशत की दर से वृद्धि होगी। वहीं, द्वितीयक क्षेत्र यानी विनिर्माण के 6.6 प्रतिशत और प्राथमिक क्षेत्र यानी कृषि, वानिकी, पशुपालन तथा खनन के 2.7 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है।
वित्त वर्ष के दौरान सरकारी खपत के 5.2 प्रतिशत बढ़कर 17,96,419 करोड़ रुपये पर पहुंचने की संभावना है जो जीडीपी का 8.9 प्रतिशत होता है। यह लगातार दूसरा साल होगा जब जीडीपी में सरकारी खपत के हिस्से में कमी आयेगी। यह 2023-24 में 9.5 प्रतिशत और पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 9.1 प्रतिशत रहा था।
निजी खपत भी सात प्रतिशत बढ़ने के बावजूद जीडीपी में उसकी हिस्सेदारी 56.5 प्रतिशत से घटकर 56.3 प्रतिशत रह जायेगी। अनुमान है कि 2025-26 में निजी खपत 1,13,67,565 करोड़ रुपये रहेगी। पूंजी निर्माण के 7.8 प्रतिशत बढ़कर 68,28,576 करोड़ रहने की संभावना है।
निर्यात के 6.4 प्रतिशत बढ़कर 43,27,569 करोड़ रुपये पर और आयात के 14.4 प्रतिशत बढ़कर 48,40,195 करोड़ रुपये पर रहने का अनुमान है।
अग्रिम अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष के दौरान लोक प्रशासन, रक्षा एवं अन्य सेवाओं की और वित्तीय, रियल एस्टेट एवं पेशेवर सेवाओं की वृद्धि दर 9.9 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। इसके बाद व्यापार, होटल, परिवहन, संचार एवं प्रसारण सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत रहने की संभावना है।
अनुमान के अनुसार, विनिर्माण और निर्माण क्षेत्रों की वृद्धि दर सात-सात फीसदी रहेगी। कृषि, वानिकी और पशुपालन क्षेत्र में 3.1 प्रतिशत और बिजली, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य यूटिलिटी सेवाओं की वृद्धि दर 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।
सिर्फ खनन क्षेत्र ही ऐसा है जिसमें गिरावट की संभावना जतायी गयी है। पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार इसमें 0.7 प्रतिशत की गिरावट रहेगी।
विश्लेषकों ने इन अनुमानों को उम्मीद के अनुरूप बताया है।
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