मुंबई , दिसंबर 05 -- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने दूसरी तिमाही के मजबूत आंकड़ों को देखते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए विकास अनुमान को बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत जबकि खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान घटाकर दो प्रतिशत कर दिया है।

केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि घरेलू स्तर पर कृषि पैदावार के आसार अच्छे बने हुए हैं, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में सुधारों का लाभ जारी है, मुद्रास्फीति कम स्तर पर बनी हुई है, कंपनियों और बैंकों की बैंलेंसशीट मजबूत है और विकास के आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। बाहरी कारकों के बारे में उन्होंने कहा कि सेवा क्षेत्र का निर्यात मजबूत बने रहने की संभावना है, हालांकि वस्तु निर्यात को लेकर बाधाएं बनी हुई हैं।

उन्होंने कहा कि इन कारकों को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

आरबीआई ने अक्टूबर की बैठक में जीडीपी वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया था।

श्री मल्होत्रा ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी के सात प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 6.7 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 6.8 प्रतिशत बढ़ सकती है।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि खुदरा मुद्रास्फीति की दर अक्टूबर में 0.25 प्रतिशत रही जो मौजूदा सीरीज (2012 का आधार वर्ष) में सबसे कम है। खाने-पीने की चीजों की महंगाई कम रहने से मुद्रास्फीति में अनुमान से अधिक गिरावट दर्ज की गयी है।

उन्होंने कहा कि खरीफ की अच्छी फसल को देखते हुए खाने-पीने की चीजों की आपूर्ति बेहतर बनी रहेगी। इसे देखते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान घटाकर दो प्रतिशत किया गया है। चालू वित्त वर्ष की 31 दिसंबर को समाप्त हो रही तीसरी तिमाही में इसके 0.6 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 2.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं, अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मुद्रास्फीति 3.9 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में चार प्रतिशत रहने की संभावना है।

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