नई दिल्ली , नवंबर 15 -- निर्यात संघों के शीर्ष संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन ( फियो ) ने वैश्विक बाजार के बदलावों से प्रभावित विभिन्न क्षेत्रों के निर्यातकों पर कर्ज और उधार के भुगतान का दबाव कम करने के भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कदमों को बड़ी राहत बताते हुए इसका स्वागत किया है।

केंद्रीय बैंक ने निर्यात आय देश में लाने के लिए तय अधिकतम समय को नौ महीने से बढ़ाकर पंद्रह महीने कर दिया है। इसके साथ ही उसने निर्यात के लिए अग्रिम भुगतान प्राप्त होने पर माल को भेजने की अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी है। फियो के एक बयान में कहा गया है कि इससे इस समय वैश्वक बाजार की कठिनाइयों से प्रभावित क्षेत्रों के निर्यातकों पर ऋण चुकाने का दबाव हल्का होगा और वे रोजमर्रा के काम काज की ऋण सुविधाओं से धन निकासी को नये ढंग से पुनर्व्यवस्थित करने का मौका मिलेगा।

केंद्रीय बैंक ने बाजार की बाहरी परिस्थितियों से प्रभावित कुछ निर्यात क्षेत्रों को द्वारा लिए गये ऐसे कुछ मियादी कर्ज के भुगतान और कामकाजी पूंजी के लिए लिए गये कर्जों पर ब्याज की वसूली को रोक दिया है अथवा टाल दिया है जिनका भुगतान इस साल एक सितंबर से 31 दिसंबर के बीच किया जाना था।

फियो के अध्यक्ष एस. सी. रल्हन ने कहा, " आरबीआई के इन फैसलों से निर्यात कारोबार को बड़ी राहत मिलेगी। इससे निर्यातक अपने विदेशी खरीदारों को उधार चुकाने के लिए और ज्यादा समय देने का प्रस्ताव कर सकते हैं।व्यापार संबंधी अनुपालन बेहतर होगा। ।"फियो अध्यक्ष ने काह इस ढ़ील से ये नियम कई अन्य अर्थव्यवस्थाओं के समान हो कसते हैं। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित होंगे।

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