बिलासपुर , अप्रैल 05 -- छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों के दाखिले में हो रही लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शनिवार को अवकाश होने के बावजूद, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रमेश सिन्हा और रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने विशेष सुनवाई की।

अदालत ने दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि प्रदेश में 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ हो चुका है, लेकिन अब तक हजारों पात्र बच्चों के आवेदनों का सत्यापन पूर्ण नहीं किया जा सका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्यभर में प्राप्त 38,438 आवेदनों में से केवल 23,766 (लगभग 62 प्रतिशत) का ही सत्यापन हुआ है, जबकि 16,000 से अधिक आवेदन लंबित हैं। कई जिलों में सत्यापन की स्थिति 10 प्रतिशत से भी कम पाई गई है।

सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) द्वारा पंजीयन एवं नोडल सत्यापन के लिए 16 फरवरी से 31 मार्च तक की समय-सीमा निर्धारित की गई थी, किंतु निर्धारित अवधि समाप्त होने के पश्चात भी प्रक्रिया अधूरी है। नोडल प्राचार्यों के स्तर पर धीमी कार्यप्रणाली के कारण संपूर्ण प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

अदालत ने कहा कि 13 से 17 अप्रैल के मध्य लॉटरी के माध्यम से स्कूल आवंटन प्रस्तावित है, किंतु वर्तमान स्थिति को देखते हुए इसमें विलंब की आशंका है। साथ ही, सत्यापन में देरी के कारण अभिभावकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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