भोपाल , नवंबर 7 -- सात वामपंथी धर्मनिरपेक्ष दलों के प्रतिनिधि मंडल ने सात नवंबर, शुक्रवार को मुख्य चुनाव निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर सात सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। मांगपत्र में मुख्य रूप से बीएलओ और एसआईआर की प्रक्रिया से उन शासकीय कर्मचारियों और अधिकारियों को हटाने की मांग की गई है, जो आरएसएस की शाखा में जाते हैं या आरएसएस से जुड़े हुए हैं।
बामपंती दलों का कहना है कि क्योंकि इनकी विचारधारा और नजरिया अल्पसंख्यक समुदायों और वर्णव्यवस्था के निचले पायदान के तबकों के प्रति वैमनस्यतापूर्ण है। इनकी वज़ह से इन समुदायों में भय है कि उन्हें मताधिकार से वंचित किया जा सकता है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, समाजवादी पार्टी, समानता दल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल के संयुक्त ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि किसी भी घर के पते में शून्य दर्ज न हो, यदि किसी घर मे 10 से ज्यादा मतदाता हैं, तो उनका भौतिक सत्यापन राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों के समक्ष किया जाए।
प्रतिनिधि मंडल ने मांग की है कि 2003 के बाद शादी होकर आयी महिलाओं से उनके मायके के दस्तावेज मांगने की बजाय उसके पति और शादी प्रमाण पत्र को ही दस्तावेज मान लिया जाए। साथ ही बीएलओ के साथ कोई महिला कर्मचारी हो ताकि महिला मतदाताओं से पूछताछ करने में कोई परेशानी न हो।
प्रतिनिधि मंडल ने यह भी मांग की है कि जिन मतदाताओं के नाम काटे जाते हैं, उनकी सूची सार्वजनिक स्थानों पर कारण सहित लगाई जाए ताकि उन्हें भी अपना नाम दर्ज कराने का अवसर मिल सके।
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