बेंगलुरु , जनवरी 06 -- कर्नाटक के सूचना एवं संचार मंत्री प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर अपनी टिप्पणी को लेकर बेंगलुरु की एक विशेष अदालत की ओर से उन्हें नोटिस जारी किए जाने की रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे डराने-धमकाने की रणनीति कहा।
श्री खरगे ने यहां पत्रकारों से कहा, "वे धमकाने की रणनीति अपना रहे हैं, यह कोई नई बात नहीं है। हम आरएसएस, उसकी फंडिंग और उसके अस्तित्व के बारे में सही सवाल उठा रहे हैं। सिर्फ इसलिए कि आप व्यक्तियों का एक समूह हैं, मुझे देश का एक भी नियम दिखाइए जो कहता हो कि आपका पंजीकरण नहीं होना चाहिए।"श्री खरगे ने सवालिया लहजे में कहा, "जिस देश में संविधान सर्वोपरि है और प्रत्येक व्यक्ति, गैर सरकारी संगठन, व्यक्तियों का संगठन और संस्था जवाबदेह है, वहां आरएसएस का जवाबदेही से बाहर रहना रहस्यमय है। आरएसएस को जवाबदेह क्यों नहीं ठहराया जाता? भारत में संविधान अभी भी जीवित है। आरएसएस संविधान से ऊपर नहीं है, न ही मैं हूं।"श्री खरगे ने आरोप लगाया कि कठपुतलियों का उपयोग कर जायज़ सवाल उठाने वालों को चुप कराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दोहराया कि आरएसएस देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने आरएसएस के कामकाज एवं वित्तीय सहायता को लेकर चिंताएं व्यक्त की। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत के बयान का हवाला देते हुए कहा कि आरएसएस अपने स्वयंसेवकों द्वारा दिए गए चंदे से चलता है। उन्होंने सवाल उठाया कि ये स्वयंसेवक कौन हैं और उनकी पहचान कैसे होती है। इसके साथ ही उन्होंने प्राप्त चंदे की मात्रा एवं प्रकृति पर स्पष्टता की आवश्यकता पर भी बल दिया।
उन्होंने आगे कहा कि ये चंदा किन तरीकों या माध्यमों से इकट्ठा किया जाता है और अगर आरएसएस पारदर्शी तरीके से काम करता है, तो दान सीधे संगठन को उसकी अपनी पंजीकृत पहचान के तहत क्यों नहीं दिया जाता? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पंजीकृत संस्था न होते हुए भी आरएसएस अपनी वित्तीय और संगठनात्मक संरचना को कैसे बनाए रखता है।
श्री खरगे ने आरएसएस के परिचालन खर्चों को लेकर चिंताएं व्यक की, जिनमें पूर्णकालिक प्रचारकों को वेतन कौन देता है और नियमित संगठनात्मक खर्चों का वहन कौन करता है, ये मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने सवाल किया कि बड़े पैमाने पर आयोजित कार्यक्रमों, अभियानों एवं जनसंपर्क गतिविधियों का वित्तपोषण कैसे होता है। उन्होंने पूछा कि इसके अलावा, जब स्वयंसेवक स्थानीय कार्यालयों से वर्दी या अन्य सामग्री खरीदते हैं तो इन निधियों का हिसाब-किताब कहां रखा जाता है और स्थानीय कार्यालयों और अन्य अवसंरचना के रखरखाव का खर्च कौन वहन करता है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित