भोपाल , दिसंबर 3 -- भोपाल गैस त्रासदी की 41वीं बरसी पर बुधवार को गैस पीड़ित संगठनों की ओर से निकाली गई रैली उस समय विवाद में बदल गई, जब हाथठेले पर रखे दो पुतलों में से एक को आरएसएस की वेशभूषा जैसी यूनिफॉर्म पहनाई गई थी। भाजपा पदाधिकारियों ने इसे आपत्तिजनक बताया और पुलिस ने पुतला जब्त कर रैली को बीच में ही रोक दिया।
गैस पीड़ित संगठन भारत टॉकीज अंडरब्रिज से जेपी नगर गैस त्रासदी स्मारक तक रैली निकालने वाले थे, लेकिन पुतले पर हुए विवाद ने माहौल तनावपूर्ण कर दिया। भाजपा मंडल अध्यक्ष आशीष सिंह ने कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचकर पुतले का विरोध किया, जिसके बाद उनकी गैस पीड़ित संगठन के पदाधिकारियों से तीखी नोकझोंक हो गई। पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
एसीपी राकेश सिंह बघेल के अनुसार एक पुतले पर आरएसएस जैसी वेशभूषा दिखाई दी, जिस पर आपत्ति उठाई गई। पुलिस ने विवादित पुतला जब्त कर रैली को रोक दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी संगठन की भावनाएं आहत हुई होंगी, तो तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
गैस पीड़ित संगठन की प्रतिनिधि रचना ढींगरा ने स्पष्ट किया कि दूसरा पुतला डाउ केमिकल और यूनियन कार्बाइड के सहयोगियों का प्रतीक मात्र था, न कि आरएसएस का। उनका कहना था कि डाउ के सहयोगियों की पहचान सामने लाने के लिए यह प्रतीकात्मक प्रयास किया गया था।
इधर राजधानी में आज गैस त्रासदी की बरसी पर सरकारी अवकाश रहा और बरकतउल्ला भवन में सर्वधर्म प्रार्थना सभा आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों ने दिवंगतों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
गैसकांड को 41 वर्ष बीत जाने के बाद भी भोपाल के हजारों लोग आज भी दूषित जल और जहरीले कचरे के कारण गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। सामाजिक संगठनों ने प्रभावितों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और मुआवजा बढ़ाने की मांग दोहराई है।
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