नयी दिल्ली , अक्टूबर 21 -- आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में राजधानी में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इस भारतीय चिकित्सा पद्धति की बढ़ती लोक प्रियता पर संतोष जताते हुए इसके चिकित्वकों और शोधकर्ताओं से इस पद्धति के बारे में भ्रामक सूचनाओं के प्रसार पर रोक, तर्कसंगत विपणन और जागरूकता बढ़ाए जाने पर बल दिया।

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान आयुर्वेद को स्वास्थ्य और कल्याण के समग्र दृष्टिकोण के रूप में बढ़ावा देने की दिशा में सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम जन स्वास्थ्य के स्थायित्व और प्राकृतिक जीवन शैली पर केंद्रित था।

आयुर्वेद दिवस (17 अक्टूबर) के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में आयुर्वेद के बारे में आमजन में वैज्ञानिक रूप से मान्य पारंपरिक ज्ञान का संचार के विषय में एनआईएससीपीआर स्वस्तिक व्याख्यान में सीसीआरएएस-केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) के डॉ. किशोर पटेल ने जीवनशैली और तनाव से जुड़ी बीमारियों के कारणों पर चर्चा की और समग्र स्वास्थ्य के लिए आचार, रसायन और सद्वृत्ति की अवधारणाओं के माध्यम से संतुलित पोषण, संयमित आहार और नैतिक जीवन जीने के महत्व पर बल दिया।

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