चंडीगढ़ , जनवरी 08 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने गुरुवार को कहा कि पंजाब सरकार ने बाढ़ राहत के मुद्दे पर राज्य के लोगों को गुमराह किया है।
श्री चुघ ने कहा कि सरकार द्वारा बड़े शोर-शराबे के साथ घोषित किया गया 20 हजार करोड़ रुपये का बहुचर्चित राहत पैकेज, पंजाब सरकार द्वारा खुद जमा किए गए अंतिम नुकसान के आकलन में आधिकारिक तौर पर घटकर सिर्फ 11,855 करोड़ रुपये रह गया है। उन्होंने कहा कि एक बार फिर, 'अरविंद केजरीवाल-भगवंत मान' की जोड़ी को मोदी सरकार के खिलाफ झूठे आरोप लगाने की कोशिश के बाद शर्मिंदा होना पड़ा है, जो हर मुश्किल घड़ी में पंजाब के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रही है।
उन्होंने कहा कि अपने दुष्प्रचार को आगे बढ़ाने के लिए मान सरकार ने विधानसभा का एक विशेष सत्र भी बुलाया, जिससे पंजाब के टैक्स देने वालोंका मेहनत का पैसा बर्बाद हुआ। यह विशेष सत्र राहत तंत्र को मजबूत करने या बाढ़ पीड़ितों का समर्थन करने के लिए नहीं बुलाया गया था, बल्कि इसका दुरुपयोग केंद्र सरकार के खिलाफ भ्रम, गलत सूचना और निराधार आरोप फैलाने के लिए किया गया। उन्होंने कहा कि यह बाढ़ घोर प्रशासनिक विफलता के कारण हुई एक साफ तौर पर मान-निर्मित आपदा थी।
बाढ़ की तैयारियों पर पहली बैठक पांच जून 2025 को बुलायी गयी थी, जो मानसून से ठीक 17 दिन पहले थी, जिससे 2,800 किलोमीटर लंबे धुस्सी बांधों और राज्यव्यापी जल निकासी चैनलों की समय पर सफाई करना असंभव हो गया। माधोपुर हेडवर्क्स में 28 में से 24 गेट खराब पाये गये, जबकि हरिके हेडवर्क्स की सालों से गाद सफाई नहीं की गयी थी, जिसके परिणामस्वरूप सैकड़ों गांवों में बड़े पैमाने पर बांध टूट गये और बाढ़ आ गयी।
श्री चुघ ने कहा कि जमीन पर घोर कुप्रबंधन के कारण स्थिति और खराब हो गयी। बड़े पैमाने पर अवैध खनन ने नदी के किनारों को कमजोर कर दिया, और रणजीत सागर बांध से पानी अचानक और देरी से छोड़े जाने से पठानकोट, गुरदासपुर और अमृतसर में बाढ़ और तेज हो गयी। चौंकाने वाली बात यह है कि दस्तावेजों से पता चलता है कि तीन सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में केवल 15 मोटरबोट उपलब्ध थीं, जिससे लोगों को खुद ही अपना बचाव करना पड़ा। जब पंजाब डूब रहा था, तो मुख्यमंत्री भगवंत मान तमिलनाडु में रिबन काटने में बिज़ी थे, और उनके मंत्री राहत काम पर ध्यान देने के बजाय फोटो खिंचवाने के लिए कैमरों के पीछे भाग रहे थे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेतृत्व ने भी दुखी पंजाबियों के साथ खड़े होने के बजाय ड्रामा और राजनीति को चुना।
उन्होंने कहा कि पहले दिन से ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्र के दखल को पक्का किया। ज़मीनी हकीकत का जायजा लेने और राहत कार्यों में तालमेल बिठाने के लिए कई केंद्रीय मंत्रियों को पंजाब और बाढ़ से प्रभावित दूसरे राज्यों में भेजा गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद प्रभावित इलाकों में गये और पंजाब के लिए 1,615 करोड़ रुपये की घोषणा की। केंद्र ने एसडीआरएफ की दूसरी किस्त के तौर पर 240.80 करोड़ रुपये भी जारी किये और कई पुनर्वास उपाय किये।
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