चंडीगढ़ , दिसंबर 30 -- हरियाणा में गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा है कि प्रदेश आपराधिक न्याय सुधारों के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में दोषसिद्धि दर में तीन गुना वृद्धि, फोरेंसिक अनुपालन में उल्लेखनीय सुधार और जांच समयसीमा के पालन में बड़ी सफलता हासिल हुई है।

डॉ, मिश्रा ने पंचकुला स्थित पीडब्ल्यूडी विश्राम गृह में अभियोजन विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय सक्षम अधिनियम का कार्यान्वयन आपराधिक न्याय प्रणाली में व्यापक परिवर्तन का प्रतीक है। उन्होंने अभियोजकों को ''न्याय का निर्माता'' बताते हुए कहा कि उनकी कानूनी दक्षता और प्रभावी पैरवी ही पुलिस जांच को पीड़ितों और समाज के लिए वास्तविक न्याय में बदलती है।

उन्होंने बताया कि एक जुलाई 2024 से 24 दिसंबर 2025 के बीच राज्य में 1,59,034 एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें से 1,37,141 मामलों में आरोपपत्र या अंतिम रिपोर्ट दाखिल की गई, जो लगभग 87 प्रतिशत है। 60 दिन की अनिवार्य जांच समयसीमा वाले करीब 70 प्रतिशत मामलों का निपटान समय पर हुआ, जबकि 90 दिन की श्रेणी में यह आंकड़ा लगभग 80 प्रतिशत रहा।

उन्होंने फोरेंसिक सुधारों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 2025 में अनिवार्य जांच वाले 97.2 प्रतिशत अपराध स्थलों पर फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम पहुंची। गंभीर अपराधों में अनिवार्य फोरेंसिक जांच से जुड़े मामलों में राज्य ने शून्य लंबितता का लक्ष्य हासिल किया है। पोक्सो मामलों में 99 प्रतिशत डीएनए पॉजिटिविटी दर दर्ज की गई है।

डॉ. मिश्रा के अनुसार नए कानूनी ढांचे के तहत दोषसिद्धि दर बढ़कर 72 प्रतिशत हो गई है, जो पहले 24 प्रतिशत थी। महज 17 महीनों में 81 हजार से अधिक मामलों का निपटारा किया गया। उन्होंने बताया कि तकनीक आधारित न्याय प्रणाली, ई-हस्ताक्षर, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ई-गवाह केंद्रों के माध्यम से 78 प्रतिशत सुनवाई वर्चुअल हो रही है।

आगे की योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि 40 मोबाइल फोरेंसिक वैन, जांच उपकरणों के आधुनिकीकरण के लिए 101 करोड़ रुपये और डीएनए व साइबर फोरेंसिक को मजबूत करने के लिए 18 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट प्रस्तावित है। गुरुग्राम में नया डीएनए प्रभाग एक जनवरी 2026 से शुरू होगा। साथ ही तीन नई जिला जेलों और सामुदायिक सेवा दिशानिर्देशों के जरिए सुधारात्मक न्याय की दिशा में हरियाणा देश का पहला राज्य बना है।

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