शिमला , नवंबर 06 -- हिमाचल किसान सभा ने गुरुवार को केंद्र और राज्य सरकार से एक- दूसरे पर जिम्मेदारी टालने के बजाय राज्य में आपदा से प्रभावित लोगों को राहत पहुँचाने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है।

किसान सभा के प्रदेश सचिव राकेश सिंघा ने गुरुवार को मंडी में आपदा प्रभावित लोगों के राज्य सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि लगातार प्राकृतिक आपदाओं ने हिमाचल प्रदेश में खेतों, घरों और आजीविका को तबाह कर दिया है। उन्होंने सरकारों से ज़मीन के बदले ज़मीन (एल4एल) और मकान के बदले मकान (एच4एच) उपलब्ध करवा कर लोगों के पुनर्वास के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की मांग की।

श्री सिंघा ने कहा, "कई प्रभावित परिवारों के पास अब अपने घरों के पुनर्निर्माण के लिए दो बीघा से भी कम ज़मीन बची है। केंद्र सरकार को वन संरक्षण अधिनियम में संशोधन करना चाहिए और सभी विस्थापित लोगों को तत्काल आवास के साथ पाँच बीघा ज़मीन उपलब्ध करानी चाहिए।" उन्होंने अस्थायी आश्रयों में रहने वाले परिवारों को मासिक किराया सहायता देने पर भी ज़ोर दिया।

महासचिव ने तत्काल कदम नहीं उठाए जाने की स्थिति में चेतावनी देते हुए कहा, ''अगर माँगें पूरी नहीं हुईं, तो 19 जनवरी को विरोध प्रदर्शनों का एक और दौर शुरू होगा। एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही राज्य सरकार से मिलकर माँगों का ज्ञापन भी सौंपेगा।"किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में विनाशकारी मानसूनी बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश को अनुमानित 18,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। केंद्र सरकार की ओर से हालांकि पुनर्वास पैकेज में देरी के कारण हज़ारों परिवार अस्थायी शिविरों या किराए के मकानों में फँसे हुए हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित