पटना , जनवरी 07 -- आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री नारायण प्रसाद ने बुधवार को कहा कि उनका विभाग सर्पदंश से पीड़ित व्यक्तियों को 24 घंटे के भीतर राहत राशि देने की नई व्यवस्था लागू करेगा, जबकि अग्निकांड पीड़ितों को अधिकतम 15 से 20 दिनों के अंदर राहत की राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जायेगा।

श्री प्रसाद ने आज राजधानी पटना स्थित सरदार पटेल भवन में आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि आपदा प्रबंधन का कार्य पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ किया जाये। उन्होंने सर्पदंश मामलों में राहत भुगतान में होने वाली देरी पर नाराजगी जताते हुये पुरानी प्रक्रिया को पूरी तरह बदलने का निर्देश दिया।

मंत्री ने कहा कि सर्पदंश के मामलों में इलाज शुरू होने से पहले डॉक्टर काटने के निशान की फोटो लेंगे और उसी के आधार पर 24 घंटे के अंदर पीड़ित को राहत राशि उपलब्ध कराई जायेगी। उन्होंने यह भी कहा कि देर से भुगतान की वजह से पीड़ितों को होने वाली परेशानी अब बर्दाश्त नहीं की जायेगी।

मंत्री ने अग्निकांड पीड़ितों के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी औपचारिकतायें समयबद्ध तरीके से पूरी कर अधिकतम 15 से 20 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाये। साथ ही सभी आपदा संबंधी मामलों को गंभीरता से लेने और एसी/डीसी और यूसी से जुड़े लंबित प्रकरणों का तत्काल निष्पादन करने के आदेश दिये।

श्री प्रसाद ने सभी जिलों में एसडीआरएफ भवन के निर्माण के लिये शीघ्र भूमि चिह्नित कर निर्माण कार्य शुरू करने का भी निर्देश दिया, जिससे आपदा की स्थिति में त्वरित राहत और बचाव कार्य संभव हो सके।

इस अवसर पर विभाग के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर पहले से चिन्हित परिवारों और इलाकों का डाटा तैयार किया जाता है, जिससे आपदा आने पर राहत राशि का शीघ्र भुगतान संभव होता है। उन्होंने फसल क्षति के भुगतान को भी समय पर सुनिश्चित करने के लिये अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिये। सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि सर्पदंश मामलों में विसरा या पोस्टमार्टम रिपोर्ट की अनिवार्यता गाइडलाइन में नहीं है।

बैठक में राज्यभर में शीतलहर से निपटने के लिये किये गये इंतजामों की भी समीक्षा की गई और इस बात की जानकारी दी गई कि राज्य में 85 से अधिक रैन बसेरा बनाये गये हैं, जहां अब तक करीब 18 हजार असहाय, वृद्ध, श्रमिक और राहगीरों को आश्रय दिया गया है। शीतलहर से राहत के लिये लगभग 5900 स्थानों पर अलाव जलाये जा रहे हैं, जिनमें 15 लाख किलोग्राम से अधिक लकड़ी का उपयोग किया गया है। इसके साथ ही 42 हजार से अधिक कंबल निराश्रित और कमजोर वर्गों में वितरित किये गये हैं।

उन्होंने कहा कि मौसम संबंधी चेतावनी के लिये 70 करोड़ से अधिक एसएमएस भेजे गये हैं, जबकि सोशल मीडिया, प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।

बैठक में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव मो. वारिस खान, आप्त सचिव पूर्णेन्दु कुमार, संयुक्त सचिव मो. नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी और अविनाश कुमार, विशेष कार्य पदाधिकारी संदीप कुमार, मंत्री के आप्त सचिव (बाह्य) अमित कुमार तिवारी सहित सभी जिलों के अपर समाहर्ता और सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी उपस्थित थे।

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