उदयपुर , फरवरी 10 -- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन( इसरो) के पूर्व अध्यक्ष एवं पद्मश्री डॉ ए एस किरण कुमार ने मंगलवार को कहा कि अंतरिक्ष मौसम आने वाले समय में भारत के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक क्षेत्र बनने जा रहा है, जिससे उपग्रहों, अंतरिक्ष मिशनों और पृथ्वी की संचार प्रणालियों की सुरक्षा संभव हो सकेगी।

डॉ कुमार ने उदयपुर सौर वेधशाला के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में उदयपुर में 'एक्सप्लोरिंग द सन एट हाई-रिजोल्यूशन: प्रेजेंट पर्सपेक्टिव्स एंड फ्यूचर होराइजन्स' थीम पर 10 से 13 फरवरी तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के आज उद्घाटन सत्र में यह बात कही। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष मौसम अब एक गंभीर चुनौती बन चुका है, जो न सिर्फ पृथ्वी को प्रभावित करता है, बल्कि अंतरिक्ष में तैनात वेधशालाओं और उपग्रहों पर भी गहरा असर डालता है। सूर्य की गतिविधियों पर पैनी नजर रखकर अब पृथ्वी और अंतरिक्ष दोनों को संभावित खतरों से पहले ही सतर्क किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि मानव सभ्यता सदियों से सूर्य का अध्ययन कर रही है। आज के वैज्ञानिक युग में हमारे पास शक्तिशाली कंप्यूटिंग सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी तकनीकें हैं, जिससे सूर्य के डेटा को 'अर्ली वॉर्निंग सिस्टम' में बदलकर मानवता को बड़े खतरों से बचाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सूर्य की गतिविधियां सीधे पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र, सैटेलाइट सिस्टम, जीपीएस, मोबाइल नेटवर्क और अंतरिक्ष यानों को प्रभावित करती हैं। इसलिए अंतरिक्ष मौसम की सटीक भविष्यवाणी आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने इसरो के आदित्य-एल1 मिशन को भारत की ऐतिहासिक जीत बताते हुए कहा कि इस मिशन से पहली बार सूर्य के प्रकाशमंडल का करीब से अध्ययन संभव हुआ जिससे वैज्ञानिकों को सूर्य की सतह और ऊर्जा उत्सर्जन को गहराई से समझने का मौका मिला और आने वाले सालों में यह डेटा अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी के लिए एक मजबूत आधार बनेगा।

इस अवसर पर निवृत्ति कुमारी मेवाड़ ने मेवाड़ की पावन धरा पर वैज्ञानिक समुदाय का स्वागत किया और अंतरिक्ष विज्ञान में वैज्ञानिकों के समर्पण की सराहना की। उन्होंने आश्वस्त किया कि महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन भविष्य में भी ऐसे वैज्ञानिक कार्यक्रमों के लिए पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा।

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