नयी दिल्ली , नवम्बर 20 -- नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने गुरूवार को कहा कि आने वाले वर्षों में देश में खाद्यान्नों की अधिक पैदावार के कारण भंडारण सुविधाओं की अधिक जरूरत होगी और भंडारण क्षमता बढ़ाने के साथ साथ उसकी गुणवत्ता पर भी खास ध्यान देना होगा।
वह यहां पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के तत्वाधान में आयोजित पैनल चर्चा "एग्रीकल्चर वेयरहाउस मार्केट इन इंडिया 2025-2030" कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। चर्चा में इसी नाम से एक खास रिपोर्ट भी जारी की गयी।
श्री चंद ने पीएचडीसीसीआई की इस रिपोर्ट की सराहना करते हुए कहा कि इसमें मात्रा और गुणवत्ता दोनों पहलुओं को व्यापक रूप से सामने रखा गया है। उन्होंने आग्रह किया कि शीत भंडारगृहों पर भी एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट तैयार की जाये ताकि इस मसले पर विस्तार से चर्चा की जा सके और सरकार के संबंधित मंत्रालय के साथ सिफारिशें साझा की जा सकें।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री विज्ञान सलाहकार कार्यालय की पूर्व वरिष्ठ सलाहकार डॉ. शैलजा वैद्य गुप्ता ने कहा कि जलवायु अनुकूल साइलो भंडारण, भारत के लिए आगे बढ़ने का सबसे उपयुक्त तरीका है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की अनिश्चितता को देखते हुए वेयरहाउसिंग क्षमता बढ़ाना, निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन देना, लॉजिस्टिक्स सुधारना और नीतिगत स्थिरता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
गौरतलब है कि एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कृषि उपज करने वाला देश और आठवां सबसे बड़ा निर्यातक बनकर उभरा है। देश में अनाज की पैदावार 2024-25 में रिकॉर्ड 354 लाख टन तक पहुंच गयी है। अनुमान है कि पैदावार 2030-31 तक लगभग 368 लाख टन तक बढ़ सकती है, इसलिए खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय बढ़ाने और नुकसान को कम करने के लिए वैज्ञानिक ढंग से भंडारण और पैदावार होने के बाद उसका उपभोक्ता तक पहुंचने की प्रणाली को सशक्त बनाना ज़रूरी है। इसलिए भंडारण का आधुनिकीकरण और निवेश आवश्यक है। निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए अनुबंध, भूमि उपलब्धता और वित्तीय सुधारों की जरूरत बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार खाद्यान्न वेयरहाउसिंग बाजार 2025-26 में 37,336 करोड़ रुपये से बढ़कर 2030-31 में 43,953 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
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