चंडीगढ़ , अप्रैल 07 -- हरियाणा के राज्यपाल प्रो.असीम कुमार घोष ने कहा कि आध्यात्मिक विकास संसार से दूर जाने में नहीं, बल्कि समाज में रहकर निष्काम भाव से अपने कर्तव्यों का पालन करने में है।
श्री घोष लोक भवन हरियाणा में शंख चटर्जी की दो पुस्तकों 'अद्वैत वेदांत-एक अनोखा दर्शन' और 'सामाजिक दृष्टिकोण में धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र' के विमोचन अवसर पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि अद्वैत वेदांत, जिसे आदि शंकराचार्य ने प्रतिपादित किया, आत्मा और परमात्मा की एकता का संदेश देता है, जबकि कुरुक्षेत्र जीवन के नैतिक संघर्ष का प्रतीक है, जहां कर्म और धर्म का मार्ग स्पष्ट होता है।
ये पुस्तकें पाठकों को जीवन, कर्तव्य और आध्यात्मिकता के गहरे आयामों पर सोचने के लिए प्रेरित करेंगी।
हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने कहा कि पुस्तकें जीवन जीने की कला सिखाती हैं और युवाओं को प्राचीन संस्कृति और आधुनिक सोच के समन्वय की दिशा में प्रेरित करती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे सृजनशील युवाओं से ही विकसित राष्ट्र का सपना साकार होगा।
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