पटना , जनवरी 16 -- राज्य की पुलिस व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, सक्षम एवं प्रभावी बनाने की दिशा में सभी पुलिस जिलों को एक- एक ड्रोन दिया जायेगा, जबकि विशेष कार्यों के लिये विशेष कार्य बल (एसटीएफ) को हाई क्वालिटी के 10 ड्रोन मुहैया कराये जायेंगे।

इस प्रकार कुल करीब 50 ड्रोन की खरीद मार्च माह तक पूरी कर ली जायेगी।

ड्रोन खरीद के इस प्रस्ताव को 14 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्रालय में आयोजित हाई पावर कमेटी की बैठक में मंजूरी दी गई है। इन ड्रोन की खरीद पर लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत आने की संभावना है। यह जानकारी अपर पुलिस महानिदेशक (आधुनिकीकरण) सुधांशु कुमार ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय स्थित सरदार पटेल भवन के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में दी।

उन्होंने बताया कि जिलों को दिये जाने वाले ड्रोन की उड़ान क्षमता लगभग 45 मिनट तक होगी। ये ड्रोन भीड़ नियंत्रण, कानून- व्यवस्था की निगरानी और अपराध नियंत्रण में बेहद उपयोगी साबित होंगे। इनमें एएनपीआर (ऑटो नंबर प्लेट रिकॉग्निशन सिस्टम) की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे सड़क पर चल रहे वाहनों की नंबर प्लेट की पहचान कर त्वरित कार्रवाई की जा सकेगी। वहीं, एसटीएफ को दिये जाने वाले हाई क्वालिटी ड्रोन की मदद से दियारा और अन्य दुर्गम इलाकों में प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जायेगी।

ड्रोन की यह खरीद केंद्र सरकार की एएसयूएमपी (असिस्टेंस टू स्टेट्स एंड यूनियन टेरिटरी फॉर मॉडर्ननाईजेशन ऑफ़ पुलिस) योजना के तहत की जायेगी, जिसमें राज्य सरकार भी अपना राज्यांश देगी।

अपर पुलिस महानिदेशक श्री कुमार ने बताया कि राज्य के सभी थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की एकीकृत सर्विलांस व्यवस्था विकसित की जा रही है। थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और डैशबोर्ड स्थापित करने के लिये एएसयूएमपी योजना के तहत 112 करोड़, 46 लाख रुपये आवंटित किये गये हैं। इसके अलावा स्मार्ट और सुरक्षित पुलिसिंग से जुड़े उपकरणों की खरीद, थाना भवनों, कर्मियों के आवास और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिये विभिन्न मदों में कुल 384 करोड़ रुपये जारी किये गये हैं।

उन्होंने बताया कि अलग- अलग जिलों में 11 नये थाना भवन, पटना के लोदीपुर में एसटीएफ का मुख्यालय भवन, बैरक, अनुमंडल स्तरीय कार्यालय समेत कई अन्य आधारभूत संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है।

फॉरेंसिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिये राज्य में सात नये फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की शुरुआत इस वर्ष मार्च से होने की संभावना है। वर्तमान में पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और पूर्णिया में चार एफएसएल कार्यरत हैं, जबकि 34 चलंत एफएसएल मोबाइल लैब भी संचालित हैं। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) समेत नये कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में फॉरेंसिक रिपोर्ट की बढ़ती अहमियत को देखते हुये एफएसएल नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।

इसके साथ ही राज्य में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) की देखरेख में साइबर यूनिट की शुरुआत भी कर दी गई है। पटना में सभी सचिवालय भवनों, जिला स्तरीय कार्यालयों और प्रमुख स्थानों की सीसीटीवी के माध्यम से निरंतर निगरानी की योजना बनाई गई है। इसके लिये सीसीटीवी कैमरे और डैशबोर्ड लगाये जायेंगे, जिस पर वित्तीय वर्ष 2025- 26 में लगभग 23 करोड़, 58 लाख रुपये खर्च होने की संभावना है।

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