नयी दिल्ली , नवंबर 3 -- प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्र ने कहा है कि भारत में आधार, को-विन और नेशनल डिजिटल एजुकेशन आर्किटेक्चर जैसे सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म दिखाते हैं कि समावेशन और दक्षता कैसे साथ चल सकते हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से बुधवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार डॉ मिश्रा ने आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के शताब्दी स्थापना सप्ताह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "4एस" मंत्र - स्कोप (दायरा), स्केल (पैमाना), स्पीड (गति) और स्किल (कौशल) - को शासन का मार्गदर्शक सिद्धांत बताया।
उन्होंने आयुष्मान भारत, डिजिटल इंडिया, यूपीआई और मिशन कर्मयोगी जैसी फ्लैगशिप पहलों का उदाहरण देते हुए कहा कि यह दर्शाता है कि कैसे प्रौद्योगिकी और मूल्य-समावेशी, नागरिक-केन्द्रित सेवा को संभव बना रही है।
विज्ञप्ति के अनुसार उन्होंने कहा, ' आधार, को-विन और नेशनल डिजिटल एजुकेशन आर्किटेक्चर जैसे प्लेटफॉर्म दिखाते हैं कि समावेशन और दक्षता कैसे साथ रह सकती है।' उन्होंने कहा कि यह स्वाभाविक है कि कई देश, खासकर विकासशील देशों में, अब भारत को विश्वबंधु और एक भरोसेमंद साझेदार है जो 'आधुनिक क्षमता को सभ्यता की समझ के साथ मिलाता है।'उन्होंने खनन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश की अग्रणी आईआईटी धनबाद के विद्यार्थियों को तकनीकी कौशल के साथ साथ विनम्रता, सामूहिकता और आचार व्यवहार के महत्व को भी समझाया। उन्होंने उन्हें सलाह दी, "तकनीकी कौशल जरूरी तो है, किंतु काफी नहीं है। मनोभाव, सामूहिक कार्य, विनम्रता और आचार भी उतने ही जरूरी हैं।" उन्होंने कहा कि देश के लक्ष्यों को पाने के लिए सामूहिक प्रयास, पारदर्शिता और सम्मान जरूरी हैं।
उन्होंने नेशनल क्वांटम मिशन, चंद्रयान-3 और आदित्य-एल-1 जैसी अंतरिक्ष की उपलब्धियों, नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के साथ 200 गीगावॉट (दो लाख मेगावाट) से अधिक अक्षय ऊर्जा क्षमता और वैज्ञानिक खोज के लिए देसी सबमर्सिबल बनाने वाले डीप ओशन मिशन जैसे अग्रणी क्षेत्र में हुई प्रगति की ओर भी इशारा किया।
डॉ. मिश्र ने इस माहौल में आईआईटी धनबाद की खास जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक प्रयोगशाला, सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर, भूगर्भीय कंपनों पर निगरानी रखने वाली वेधशाला और नवाचार के बढ़ते इनक्यूबेशन पारिस्थितिक तंत्र के साथ, यह संस्थान देश की जरूरतों में योगदान देने के लिए बेहतर स्थिति में है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के तहत इसे विशिष्टता केन्द्र (सेंटर ऑफ एक्सिलेंस) का दर्जा मिला है जो महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में देश की रणनीति तय करने में संस्थान की क्षमता में देश के भरोसे को दर्शाता है।
उन्होंने संस्थान से जलवायु, खनिज, ऊर्जा संक्रमण, सामग्री और उन्नत विनिर्माण पर ध्यान देने और अनुसंधान को लोगों के हित में करने की अपील की और भविष्य को आकार देने में प्रौद्योगिकी की बदलाव लाने वाली भूमिका पर जोर दिया।
डॉ मिश्र ने इस कार्यक्रम के आमंत्रण के लिए संस्थान के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्र और आयोजक टीम को धन्यवाद दिया और शिक्षकों, छात्रों और पूर्व-छात्रों को उनके भविष्य के कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं।
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