नयी दिल्ली , नवंबर 12 -- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि आदिवासी समुदायों का उत्थान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और केंद्र सरकार आर्थिक उन्नति के लिए पूरी तरह से प्रयासरत है।
श्री गोयल ने यहां जनजातीय व्यापार सम्मेलन में कहा है कि भारत की प्रगति और विकास इस बात पर निर्भर करता है कि प्रगति हर घर तक पहुंचे, खासकर आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों में। श्री गोयल ने दोहराया कि आदिवासी और स्वदेशी समुदायों का उत्थान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जो समावेशी और सतत विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि निर्यात क्षमता वाले सभी आदिवासी उत्पादों को वाणिज्य विभाग द्वारा विभिन्न माध्यमों से पूर्ण समर्थन दिया जायेगा। इसमें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, उत्पाद प्रदर्शन और बिक्री के लिए अंतर्राष्ट्रीय गोदाम शामिल हैं।
कार्यक्रम में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम की मौजूदगी में कई उत्पादों को जीआई टैग भी प्रदान किये गये। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा जनजातीय कार्य मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से आयोजित यह सम्मेलन बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित जनजातीय गौरव वर्ष का हिस्सा है।
श्री गोयल ने बताया कि निर्यात संवर्धन प्रयासों को मजबूत करने के लिए वर्तमान में एक योजना विकसित की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आदिवासी उत्पादों को घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों में वह पहुंच प्राप्त हो जिसके वे हकदार हैं।
उन्होंने बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उन्होंने आदिवासी समुदाय को दिशा और नेतृत्व दिखाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को बिरसा मुंडा के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिये और आदिवासी समुदाय के उत्थान, आजीविका में वृद्धि और यह सुनिश्चित करने के लिए उनके पदचिह्नों पर चलना चाहिये कि प्रत्येक आदिवासी परिवार सुख और समृद्धि से भरा हो।
उन्होंने कहा कि जिस तरह आदिवासी समुदायों ने अपने इतिहास और विरासत को दृढ़ता और समर्पण के साथ जीवित रखा है, वह सचमुच सराहनीय है। उन्होंने आदिवासी समुदाय की शक्ति और दृढ़ संकल्प के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया और कहा कि भारत के सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने में उनका योगदान अमूल्य है।
श्री गोयल ने बताया कि इस वर्ष जनजातीय कार्य मंत्रालय के बजट आवंटन में 50 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है। प्रधानमंत्री-जनमन योजना के तहत, विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूहों के लगभग 50 लाख परिवारों को लाभ हुआ है, और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए 24,000 करोड़ रुपये वितरित किये गये हैं।
सम्मेलन में ग्राम्य युवा अर्थ नीति (ज्ञान) लैब का शुभारंभ किया गया। इसे अशांक देसाई स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी, आईआईटी बॉम्बे और प्रयोग फाउंडेशन द्वारा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सहयोग से विकसित किया गया है। ज्ञान लैब आदिवासी और ग्रामीण उद्यमों के लिए नये मॉडल तैयार करने और उनका परीक्षण करने के लिए क्षेत्रीय अनुभव, प्रौद्योगिकी और नीति को एक मंच पर लाता है।
जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा स्टार्टअप इंडिया और डीपीआईआईटी के सहयोग से जनजातीय कार्य ग्रैंड चैलेंज घोषित किया गया। यह पहल स्टार्टअप्स और उद्यमों को आदिवासी समुदायों के लिए उच्च-प्रभावी समाधान तैयार करने के लिए आमंत्रित करती है।
रूट्स टू राइज़ सत्र में दो दौर की स्क्रीनिंग के बाद 115 उद्यमों का चयन किया गया, जिनमें से 43 के पास डीपीआईआईटी पंजीकरण संख्या है। 10 इनक्यूबेटर चयनित उद्यमों को इनक्यूबेशन सहायता प्रदान करने के लिए सहमत हुये। वहीं, 57 उद्यमों को 50 से अधिक वीसी, एआईएफ, वीसी, एंजेल निवेशकों सहित निवेशकों से निवेश के लिए रुचि प्राप्त हुई, जिन्होंने 10 करोड़ रुपये से अधिक की कुल प्रतिबद्धता के साथ भाग लिया। कुल 33 उद्यमों ने आईएफसीआई वेंचर कैपिटल फंड्स लिमिटेड और अरोड़ा वेंचर पार्टनर्स जैसे संगठनों से निवेशकों की रुचि आकर्षित की।
इन स्टार्टअप्स और उद्यमों ने लगभग 1,500 प्रत्यक्ष रोज़गार और 10,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित किये हैं, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में कुल मिलाकर 20,000 से अधिक जनजातीय लोगों को सेवा मिल रही है।
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