रांची , मार्च 23 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर राज्य की उपराजधानी दुमका में शुद्ध पेयजल को लेकर बड़ा निशाना साधा है।

श्री मरांडी ने कहा कि आदिवासी परिवार आज भी शुद्ध पेयजल से वंचित हैं। यहां के लोग मजबूरी में डोभा, ज़ोरिया और झरनों का गंदा पानी पीने को विवश हैं।

उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन जी ने हाल के दिनों में रसोई गैस और पेट्रोल-डीज़ल को लेकर जनता को भड़काने की कोशिश की, हालांकि कर्मठ अधिकारियों ने स्थिति को संभाल लिया।

लेकिन ज़रा झारखंड की उपराजधानी दुमका की वास्तविक स्थिति पर भी नज़र डालिए। जिस दुमका को सोरेन परिवार अपनी जागीर समझता है, उसी दुमका जिले के गोपीकांदर प्रखंड अंतर्गत खड़ीबाड़ी गांव के पहाड़िया टोला में रहने वाले आदिवासी परिवार आज भी शुद्ध पेयजल से वंचित हैं। यहां के लोग मजबूरी में डोभा, ज़ोरिया और झरनों का गंदा पानी पीने को विवश हैं।

श्री मरांडी ने कहा कि स्वच्छ पानी के अभाव में ग्रामीण अक्सर बीमार पड़ रहे हैं और बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। गांव में लगे चापाकल और जलमीनार वर्षों से खराब पड़े हैं। कई बार शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

श्री मरांडी ने का कि हेमंत सोरेन को पेट्रोल-डीज़ल पर राजनीति करने के बजाय, उन बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए जो सीधे जनता के जीवन से जुड़ी हैं। पेयजल उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन इस दिशा में भी उनकी विफलता साफ दिखाई दे रही है।

श्री मरांडी ने कहा कि दुमका डीसी मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए चापाकल और जलमीनार की शीघ्र मरम्मत सुनिश्चित कराएं, तथा जब तक जलमीनार पूरी तरह चालू नहीं हो जाती, तब तक टैंकर के माध्यम से नियमित पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था की जाए।

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