गांधीनगर , जनवरी 03 -- गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शनिवार को यहां कहा कि आदिवासी समाज के आर्थिक उत्थान के लिए प्राकृतिक खेती और शिक्षा सबसे सशक्त माध्यम है।
श्री देवव्रत की अध्यक्षता में आज गांधीनगर स्थित 'लोकभवन' में आदिजाति विकास विभाग द्वारा क्रियान्वित योजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वरोजगार तथा कृषि क्षेत्र में हो रहे व्यापक सुधारों पर विस्तार से चर्चा हुई।
राज्यपाल ने आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के बढ़ते स्तर तथा विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा में समान प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि देश की प्रगति तभी संभव है जब आदिवासी समाज आर्थिक रूप से सशक्त बने। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती एवं बागवानी अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
आदिवासी समाज द्वारा उत्पादित 'श्री अन्न', मिलेट्स की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि अगर परिवार के सभी सदस्य सामूहिक प्रयास के साथ आगे बढ़ें, तो प्रगति की गति कई गुना बढ़ सकती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न हो तथा आदिवासी समुदायों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता बनी रहनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार गुजरात में आदिवासी जनसंख्या 89.17 लाख है, जो राज्य की कुल जनसंख्या का 14.8 प्रतिशत है। देश की कुल आदिवासी आबादी का 8.1 प्रतिशत हिस्सा गुजरात के 14 जिलों के 5,884 गांवों में बसा है। आदिजाति विकास विभाग के वर्ष 2025-26 के कुल बजट में शिक्षा के लिए सर्वाधिक 3,310.67 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
राज्य में 457 प्राथमिक, 164 माध्यमिक तथा 44 उच्चतर माध्यमिक सहित कुल 665 आश्रम शालाएं संचालित हैं, जिनमें एक लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। राज्य की 74 आदर्श आवासीय शालाओं में 11,760 विद्यार्थियों की क्षमता है तथा इन विद्यालयों का एसएससी बोर्ड परिणाम 97.23 प्रतिशत रहा है। इसके अतिरिक्त 1,000 से अधिक छात्रावासों के माध्यम से 74,000 से अधिक विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही छात्रवृत्ति एवं विद्या साधना योजना से विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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