जगदलपुर , नवम्बर 11 -- कभी जंगलों में बंदूक थामे हिंसा का रास्ता अपनाने वाले 30 आत्मसमर्पित माओवादी अब छत्तीसगढ़ के बस्तर में जीवन का नया अध्याय लिख रहे हैं। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के संयुक्त प्रयासों से ये पूर्व उग्रवादी अब आत्मनिर्भरता और मानसिक शांति की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और विकास को साथ लेकर चलने की नीति अपनाई है। इसी क्रम में बीजापुर जिले से आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को जगदलपुर स्थित आड़ावाल लाइवलीहुड कॉलेज में कौशल विकास और मानसिक सशक्तिकरण के विशेष कार्यक्रम से जोड़ा गया है। यहां ये पूर्व माओवादी मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत तीन महीने का गेस्ट सर्विस एसोसिएट प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जिसमें होटल प्रबंधन, ग्राहक संवाद और सॉफ्ट स्किल्स जैसी व्यावहारिक क्षमताएं सिखाई जा रही हैं।

इसके साथ ही आर्ट ऑफ लिविंग संस्था द्वारा संचालित सुदर्शन क्रिया कार्यक्रम इन पूर्व माओवादियों के जीवन में नया संतुलन ला रहा है। प्रशिक्षक राजेश पांडे ने बताया कि "सुदर्शन क्रिया केवल एक योग अभ्यास नहीं, बल्कि आत्म-संवाद और भावनात्मक स्थिरता का माध्यम है। इस तकनीक से तनाव और भय की जगह अब आत्मविश्वास और सुकून ने ले ली है।"लाइवलीहुड कॉलेज की प्रभारी अर्चना ठाकुर ने कहा कि सरकार का उद्देश्य इन्हें न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है, बल्कि समाज की मुख्यधारा से सम्मानपूर्वक जोड़ना भी है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन्हें बस्तर के होमस्टे, रिसॉर्ट्स और पर्यटन स्थलों पर रोजगार के अवसर दिए जाएंगे।

बस्तर पुलिस और प्रशासन का मानना है कि ऐसे प्रयास न केवल पुनर्वास की दिशा में कदम हैं, बल्कि यह उन क्षेत्रों में स्थायी शांति और विकास की नींव भी रखेंगे, जहां कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि आत्म-सुधार और अवसर के मेल से हिंसा की राह छोड़ चुके लोग भी समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक बन सकते हैं।

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