जगदलपुर , जनवरी 07 -- छत्तीसगढ में हिंसा के पथ को छोड़कर शांति और विकास की 'नई राह' यानी 'नुवा बाट' अपनाने वाले पुनर्वासितों नक्सलियों के लिए जिला प्रशासन ने एक विशेष भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस पहल के तहत पुनर्वास केंद्र में रह रहे सदस्यों को बस्तर के प्रमुख दर्शनीय, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने तथा क्षेत्र की समृद्ध विरासत से परिचित कराने का प्रयास किया गया।

बुधवार को प्राप्त जानकारी के अनुसार भ्रमण की शुरुआत बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के दर्शन से हुई, जहाँ सभी ने शांतिपूर्ण भविष्य की कामना की। इसके बाद उन्हें दलपत सागर और बस्तर दशहरा के केंद्र 'दशहरा पसरा' ले जाया गया, जहाँ क्षेत्र की गौरवशाली परंपराओं से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के तहत पुनर्वासितों ने कलेक्टोरेट का भी दौरा किया और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को नज़दीक से देखा। दिन का अंतिम पड़ाव प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात रहा, जहाँ प्रकृति के मनोरम दृश्यों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "यह भ्रमण केवल पर्यटन नहीं, बल्कि एक व्यापक पुनर्वास प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका उद्देश्य इन सदस्यों को भयमुक्त वातावरण का अनुभव कराना, उन्हें क्षेत्र के विकास से जोड़ना और उनकी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना है।"कार्यक्रम में शामिल एक पुनर्वासित व्यक्ति ने कहा, "इस भ्रमण ने हमें विश्वास दिलाया है कि शांति और समाज के साथ कदमताल करने में ही सही भविष्य निहित है। अपनी जड़ों और बस्तर की बदलती तस्वीर को देखकर अच्छा लगा।"यह पहल उन लोगों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित करने और सामाजिक समरसता बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक कदम मानी जा रही है। प्रशासन का यह प्रयास पुनर्वासितों को सम्मानजनक जीवन जीने के नए अवसर प्रदान करने के लिए जारी रहेगा।

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