नयी दिल्ली , नवंबर 19 -- दिल्ली की एक विशेष एनआईए अदालत ने बुधवार को कथित गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई को एनआईए की 11 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया । उसे दिन में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुँचने पर गिरफ्तार किया गया था।

भानु के नाम से भी मशहूर अनमोल बिश्नोई, प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) से जुड़े एक आपराधिक-आतंकवादी सिंडिकेट से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपी है।

विशेष लोक अभियोजक राहुल त्यागी ने इस मामले में एनआईए की ओर से अदालत से 15 दिन की हिरासत की माँग की थी। उनका तर्क था कि बिश्नोई से हिरासत में पूछताछ इस मामले में जाँच के लिए महत्वपूर्ण है। एनआईए ने कहा कि बिश्नोई लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का एक प्रमुख सदस्य है और विदेश से रची गई एक व्यापक साजिश में शामिल था। इस साजिश में कथित तौर पर धन जुटाना, युवाओं की भर्ती करना और देश में आतंक फैलाने के लिए प्रमुख व्यक्तियों की लक्षित हत्याओं की योजना बनाना शामिल था।

उन्होंने अदालत से कहा कि बिश्नोई को 17 जनवरी, 2025 को भारत से कथित रूप से फरार होने के बाद "घोषित अपराधी" घोषित किया गया था।

एजेंसी ने जांच के उन विशिष्ट पहलुओं को रेखांकित किया जिनसे पूछताछ की आवश्यकता है, जिसमें कथित आपराधिक साजिश में बिश्नोई की सटीक भूमिका, उसके खिलाफ सबूतों का पता लगाना और अपराध करने के लिए इस्तेमाल की गई कार्यप्रणाली को समझना शामिल है।

बिश्नोई की ओर से बचाव पक्ष के वकील ने एनआईए की अर्जी का कड़ा विरोध किया और उसे खारिज करने की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि दलीलों में पहले से मौजूद सबूत शामिल थे और पुलिस हिरासत के लिए और कुछ भी आवश्यक नहीं है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि मामला किसी प्रत्यक्ष सबूत पर आधारित नहीं है। अनमोल के वकील ने कहा कि बिश्नोई जांच में पूरी तरह से सहयोग करने के लिए तैयार है और उसके भागने का कोई खतरा नहीं है। बचाव पक्ष ने अदालत से डीके बसु और मिहिर राजेश शाह मामलों में हिरासत में व्यक्तियों के साथ व्यवहार के संबंध में उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

दोनों पक्षों को सुनने और केस रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने बिश्नोई के खिलाफ "गंभीर" आरोपों को देखते हुए कहा कि उसकी विशिष्ट भूमिका और व्यापक साजिश की जाँच "उजागर" किए जाने की आवश्यकता है।अदालत ने मांगी गयी 15 दिनों की हिरासत के बजाय 11 दिनों की एनआईए हिरासत प्रदान की। लेकिन अदालत ने हिरासत के दौरान पारदर्शिता और आरोपी के ठीक रहने को सुनिश्चित करने के लिए कड़ी शर्तें भी लगाईं हैं।

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