नयी दिल्ली , नवम्बर 18 -- विदेश मंत्री डा.एस जयशंकर ने आतंकवाद को गंभीर खतरा बताते हुए दुनिया से इसे कतई बर्दाश्त नहीं करने का आह्वान किया है और कहा है कि आतंकवाद को लेकर कोई लीपापोती नहीं की जा सकती। डा. जयशंकर ने बदलती परिस्थितियों के अनुरूप शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की कार्य प्रणाली में सुधारों की भी पुरजोर वकालत की है। दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच आपूर्ति से संबंधित जोखिमों को भी उन्होंने चिंता का विषय करार दिया।

विदेश मंत्री ने मंगलवार को रूस की राजधानी मास्को में एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए जोर देकर कहा कि इस संगठन की स्थापना आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद की बुराइयों से निपटने के लिए की गयी थी लेकिन बीते वर्षों में ये खतरे और गंभीर हो गये हैं। उन्होंने सभी तरह के आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने का आह्वान करते हुए कहा कि इसे किसी भी तरीके से उचित नहीं ठहराया जा सकता और इस मामले में कोई लीपापोती नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि भारत ने आतंकवादी हमलों के जवाब में अपने लोगों की रक्षा करने के अधिकार का इस्तेमाल किया है।

उन्होंने कहा , " हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि एससीओ की स्थापना आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद की तीन बुराइयों से निपटने के लिए की गई थी। बीते वर्षों में ये खतरे और भी गंभीर हो गए हैं। यह आवश्यक है कि दुनिया आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के प्रति शून्य सहिष्णुता प्रदर्शित करे। इसमें कोई औचित्य नहीं हो सकता, कोई अनदेखी नहीं हो सकती, और कोई लीपापोती नहीं हो सकती। जैसा कि भारत ने सिद्ध किया है, हमें आतंकवाद से अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार है और हम इसका प्रयोग करेंगे।"डा. जयशंकर ने एससीओ की कार्यप्रणाली में सुधार की वकालत करते हुए कहा कि संगठन निरंतर विकसित हो रहा है और भारत इसके सुधार-उन्मुख एजेंडे का पुरज़ोर समर्थन करता है। उन्होंने कहा," हम सभी मानते हैं कि एससीओ को समकालीन परिवर्तनों के साथ तालमेल बिठाना होगा। यह नई सोच और नए सहयोगों में परिलक्षित होना चाहिए।" उन्होंने कहा कि भारत संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और साइबर सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने वाले केंद्रों का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा ," जैसे-जैसे संगठन अधिक विविध होता जा रहा है, एससीओ को और अधिक लचीला और अनुकूलनशील होना होगा। इस उद्देश्य से, अंग्रेजी को एससीओ की आधिकारिक भाषा बनाने के लंबे समय से विलंबित निर्णय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।"उन्होंने कहा कि भारत की पहल पर स्टार्टअप और नवाचार पर एससीओ विशेष कार्य समूह और एससीओ स्टार्ट-अप फोरम अच्छे उदाहरण हैं। इनका उद्देश्य नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा देना है, विशेष रूप से युवा पीढ़ी को लक्षित करना।

विदेश मंत्री ने मौजूदा वैश्विक आर्थिक स्थिति को अनिश्चित और अस्थिर बताते हुए कहा कि मांग-पक्ष की जटिलताओं के कारण आपूर्ति-पक्ष के जोखिम और बढ़ गए हैं। इसे देखते हुए जोखिम कम करने और विविधीकरण की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने कहा, " यह सबसे अच्छा तभी होगा जब हममें से अधिक से अधिक लोग यथासंभव व्यापक आर्थिक संबंध स्थापित करें। इसके लिए यह आवश्यक है कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायसंगत हो। आप में से कई लोगों के साथ मुक्त व्यापार व्यवस्थाएं स्थापित करने के भारत के प्रयास प्रासंगिक हैं।"उन्होंने कहा कि भारत ने एससीओ सदस्यों के साथ दीर्घकालिक ऐतिहासिक संबंधों के मद्देनजर तियानजिन एससीओ शिखर सम्मेलन में एक एससीओ सभ्यता संवाद मंच शुरू करने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा , " सभ्य राष्ट्र के रूप में भारत का दृढ़ विश्वास है कि लोगों के बीच आदान-प्रदान किसी भी वास्तविक संबंध का मूल है। हमारे बुद्धिजीवियों, कलाकारों, खिलाड़ियों और सांस्कृतिक हस्तियों के बीच बेहतर संपर्क को सुगम बनाने से एससीओ में गहरी समझ का मार्ग प्रशस्त होगा।"विदेश मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, महामारियों और संघर्षों के दौर में मानवीय सहयोग महत्वपूर्ण है और भारत इस दिशा में कदम उठा रहा है।

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