जोधपुर , मार्च 14 -- केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा है कि हजारों वर्षों तक चले विदेशी आक्रमणों और करीब दो सौ वर्षकी अंग्रेजी गुलामी के दौरान जितना नुकसान भारत की संस्कृति और परंपराओं को नहीं हुआ, उससे कहीं अधिक क्षति आजादी के बाद के 60-65 वर्षों में हुई।
श्री शेखावत निवार को जोधपुर स्थित जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय में आयोजित 'भारत की विश्व विरासत: राजस्थान' प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हालांकि अब देश एक नये सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर में प्रवेश कर रहा है और अदम्य जिजीविषा के बल पर भारत एक बार फिर मजबूती से खड़ा होने के लिए तैयार है। भारत अब अपनी सांस्कृतिक पहचान और विरासत को पुनर्स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस दौर में राष्ट्रीय अभिलेखागार और सांस्कृतिक धरोहरों से जुड़े आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
श्री शेखावत ने कहा कि देश के अभिलेखागारों में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और अन्य उच्च पदों के बीच हुए सरकारी पत्राचार के साथ-साथ निजी पत्रों के भी करोड़ों पृष्ठ सुरक्षित हैं। इन दस्तावेजों को राष्ट्रीय संपत्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल वर्तमान पीढ़ी ही नहीं, अपितु आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अमूल्य धरोहर हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर सरकार ने इन दस्तावेजों के संरक्षण के लिए व्यापक डिजिटलीकरण कार्यक्रम शुरू किया है। उनके अनुसार यह दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटलीकरण अभियान है, जिसके तहत प्रतिदिन लाखों पृष्ठों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जा रहा है। इससे न केवल सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित हो रही है, बल्कि बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं।
उन्होंने भारत की प्राचीन पांडुलिपि परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में हजारों वर्षों से विद्वानों ने ताड़पत्र, भोजपत्र, पेड़ों की छाल और रेशमी कपड़ों पर ज्ञान को लिपिबद्ध किया। ये पांडुलिपियां विभिन्न भाषाओं और लिपियों में लिखी गयी हैं और भारत की बौद्धिक विरासत की अनमोल निधि हैं।
उन्होंने कहा कि इस धरोहर को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य से सरकार ने ज्ञान भारतम मिशन शुरू किया है। उन्होंने कहा कि इस मिशन के तहत पांडुलिपियों और दस्तावेजों को कंप्यूटर-रीडेबल बनाया जा रहा है, ताकि भारत का ज्ञान विश्व समुदाय के लिए सुलभ हो सके। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता ली जा रही है, जिसके माध्यम से 22 भारतीय भाषाओं में सामग्री को पढ़ने और अनुवाद करने की सुविधा विकसित की जा रही है। उन्होंने हाल में नयी दिल्ली में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा कि यह आयोजन भारत के लिए गर्व का विषय था। उन्होंने बिना नाम लिए विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोग अपने विरोध का प्रदर्शन करने में लगे थे, लेकिन लाखों लोगों ने एआई समिट में पहुंचकर भारत की तकनीकी और सांस्कृतिक क्षमता को देखा।
श्री शेखावत ने कहा कि सम्मेलन के दौरान जब विश्व के लगभग 20 राष्ट्राध्यक्षों को इंडिया पवेलियन दिखाया जा रहा था, तब ज्ञान भारतम मिशन के बारे में जानकारी देने के लिए मात्र 30 सेकंड का समय तय था, लेकिन जैसे ही मिशन की चर्चा शुरू हुई, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं माइक संभाल लिया और लगभग आधे घंटे तक भारत की ज्ञान परंपरा और इस मिशन की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर केवल अतीत की स्मृति नहीं, अपितु भविष्य की दिशा तय करने वाली शक्ति है और इसे संरक्षित तथा वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
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