नागपुर , मई 01 -- महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री एवं नागपुर तथा अमरावती के पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने शुक्रवार को नागरिकों से आगामी जनगणना में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।
श्री बावनकुले ने कहा कि केवल भारत के निवासी ही इसके पात्र होंगे, जबकि बंगलादेशियों सहित सभी विदेशी नागरिकों को इस प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा। महाराष्ट्र स्थापना दिवस के ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री बावनकुले ने आगामी डिजिटल जनगणना, बुनियादी ढांचे के विकास, कृषि और जन कल्याण सहित कई मुद्दों पर चर्चा की। भारत के डिजिटल शासन की ओर बढ़ते कदमों पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने घोषणा की कि स्वतंत्रता के बाद की यह आठवीं जनगणना, पहली बार पूरी तरह से डिजिटल प्रारूप में आयोजित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि नागरिक एक मई से 15 मई के बीच एक ऑनलाइन मंच के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। उन्होंने लोगों से पोर्टल के माध्यम से सटीक जानकारी जमा करने की अपील की। सोलह मई से 14 जून तक फील्ड एन्यूमरेटर (गणना करने वाले कर्मचारी) मोबाइल-आधारित एप्लिकेशन का उपयोग करके घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे।
उन्होंने कहा कि यह कवायद आवास, जाति, धर्म, साक्षरता, रोज़गार और प्रवासन के तरीकों पर अहम डेटा इकट्ठा करेगी, जिससे नीति बनाने में मदद मिलेगी।
श्री बावनकुले ने बताया कि जाति-आधारित डेटा एंट्री के प्रावधानों को स्व-गणना प्रणाली में शामिल किया गया है और ये भौतिक सत्यापन चरण का भी हिस्सा होंगे। जनगणना को एक अहम लोकतांत्रिक कवायद बताते हुए, उन्होंने भविष्य की योजनाओं के लिए भरोसेमंद डेटा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक भागीदारी की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। दूसरे राज्यों में मज़दूरी के प्रवाह को लेकर जताई गई चिंताओं का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र एक आर्थिक केंद्र बना हुआ है, लेकिन सरकार स्थानीय रोज़गार की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने बताया कि 17 लाख करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (एमओयू ) पर हस्ताक्षर किए गए हैं और इन परियोजनाओं में स्थानीय लोगों के लिए 80 प्रतिशत नौकरियों का आरक्षण सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में बाहरी तकनीकी विशेषज्ञता की ज़रूरत पड़ सकती है। किसानों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मंत्री ने कहा कि कृषि कल्याण को प्राथमिकता दी जाएगी, भले ही इसके लिए अन्य विकास कार्यों में कटौती करनी पड़े। खेतों तक निर्बाध सड़क पहुंच, बिजली और पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही उर्वरक वितरण में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
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